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Cancer का इलाज होगा संभव? mRNA वैक्सीन के ट्रायल में चौंकाने वाले नतीजे

Pancreatic Cancer Symptoms : पैंक्रियाटिक कैंसर के खिलाफ नया हथियार मिल गया है। mRNA वैक्सीन के फेज-1 क्लिनिकल ट्रायल में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। mRNA टेक्नोलॉजी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को ट्यूमर कोशिकाओं की पहचान करने और उन्हें नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती है।

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भारत

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Manoj Vashisth

Feb 20, 2025

Pancreatic Cancer treatment with mRNA Vaccine Surprising results in trial

Pancreatic Cancer treatment with mRNA Vaccine Surprising results in trial

Pancreatic cancer clinical trial : पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में mRNA वैक्सीन ने सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक फेज-1 क्लिनिकल ट्रायल में, आधे प्रतिभागियों ने ट्रायल वैक्सीन का सकारात्मक जवाब दिया। इन रोगियों में टी-सेल्स उत्पन्न हुए, जो उनकी ट्यूमर कोशिकाओं को लक्षित कर सकते हैं। इससे उनके जीवनकाल में आठ साल तक की वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।

Pancreatic cancer: एक घातक बीमारी

पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic cancer) को आमतौर पर देर से पहचाना जाता है क्योंकि इसके शुरुआती चरणों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। 95% से अधिक मामलों में, यह बीमारी उस समय तक बढ़ चुकी होती है जब इसका पता चलता है। यही कारण है कि इस कैंसर से पीड़ित केवल 13% लोग ही पांच साल से अधिक जीवित रहते हैं।

कैंसर के इलाज में mRNA टेक्नोलॉजी

mRNA टेक्नोलॉजी को कैंसर के इलाज के लिए विकसित किया जा रहा है। यह तकनीक शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को ट्यूमर कोशिकाओं की पहचान करने और उन्हें नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती है। वर्तमान में, इस टेक्नोलॉजी को मेलानोमा, कोलोरेक्टल कैंसर और अन्य ठोस ट्यूमरों के लिए भी जांचा जा रहा है।

mRNA वैक्सीन कैसे काम करती है?

mRNA कैंसर वैक्सीन को प्रभावी बनाने के लिए, इसे बड़ी संख्या में टी-सेल्स उत्पन्न करने होते हैं। टी-सेल्स शरीर की सुरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें कैंसर कोशिकाओं को लंबे समय तक पहचानने और नष्ट करने में सक्षम होना चाहिए। हालांकि, यह प्रक्रिया वायरस के मुकाबले कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ अधिक जटिल होती है।

क्लिनिकल ट्रायल का निष्कर्ष

नए ट्रायल में 16 ऐसे पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic cancer) रोगियों को शामिल किया गया जिनके ट्यूमर सर्जरी द्वारा निकाले जा सकते थे। इन रोगियों के ट्यूमरों से अनुकूलित mRNA वैक्सीन तैयार की गई, ताकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को ट्यूमर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।

सभी प्रतिभागियों को मानक उपचार – सर्जरी, कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी ड्रग (एटेज़ोलिज़ुमैब) भी दी गई। परिणामस्वरूप, आधे मरीजों में वैक्सीन ने सकारात्मक प्रभाव दिखाया और उनकी टी-सेल्स ने कैंसर कोशिकाओं को लक्षित किया। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि सफल प्रतिक्रिया देने वाले मरीजों में कैंसर से लड़ने वाली टी-सेल्स औसतन आठ वर्षों तक सक्रिय रह सकती हैं।

भविष्य की संभावनाएं

शोधकर्ताओं का मानना है कि mRNA वैक्सीन तकनीक भविष्य में पैंक्रियाटिक कैंसर के लिए एक प्रभावी उपचार विकल्प बन सकती है। हालांकि, यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है और अधिक बड़े स्तर पर परीक्षण की आवश्यकता है। फिर भी, इस तकनीक ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक नई उम्मीद जरूर जगाई है।

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