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देश में बिकने वाली दवाओं को लेकर बड़ा खुलासा, हर कोई हैरान

देश में बिकने वाली दवाओं में 0.1 प्रतिशत से 0.3 प्रतिशत नकली हैं, जबकि चार से पांच प्रतिशत दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।

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Santosh Trivedi

Feb 09, 2017

देश में बिकने वाली दवाओं में 0.1 प्रतिशत से 0.3 प्रतिशत नकली हैं, जबकि चार से पांच प्रतिशत दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। नकली दवाओं में बाजार में सबसे ज्यादा एंटी बायोटिक बेची जा रही है, क्योंकि इन पर मोटा मुनाफा मिलता है। सरकार के एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में ये बातें सामने आई हैं, जिसके आंकड़े जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे।

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राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार से शुरू हुए इंटरनेशनल ऑथेंटिकेशन कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के उपनिदेशक रंगा चंद्रशेखर ने बताया कि नकली दवाओं के विश्वसनीय आंकड़ों के लिए अब तक कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ था। सरकार ने देशभर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में दवा दुकानों से 47 हजार नमूने एकत्र किए, जिनकी जांच में पाया गया है कि दवा बाजार में 0.1 से 0.3 प्रतिशत नकली हैं। इस सर्वेक्षण में एक स्वयंसेवी संस्था की भी मदद ली गई है।

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जांच के लिए 'दवा एप'

उन्होंने कहा कि निर्यात से पहले सभी दवाओं के नमूनों की जांच की जाती है और उनके मानकों से कमतर पाए जाने की स्थिति में निर्यात की जाने वाली पूरी खेप को वापस भेजने का प्रावधान है। निर्यात की जाने वाली दवाओं के लिए ड्रग ऑथेंटिकेशन एंड वेरिफिकेशन एप्लिकेशन (दवा एप) भी बनाया गया है, जिससे किसी भी चरण में दवा की प्रामाणिकता की जांच की जा सकती है।

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मानकों के अनुरूप नहीं पांच प्रतिशत दवाएं

चंद्रशेखर ने कहा कि चार से पांच प्रतिशत दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतर पाई। ये दवाएं वास्तविक विनिर्माताओं की थीं। हालांकि, इनके मानक से कमतर होने के कई कारण हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण उनके भंडारण में कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश में मौसमी विविधता के कारण आपूर्ति शृंखला में दवाओं को नमी आदि से बचा पाना मुश्किल होता है जिससे उनकी रासायनिक संरचना प्रभावित होती है।