
खून में प्लैटलेट्स का बढ़ना भी एक बीमारी होती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Platelet Disorder Symptoms: जब भी हमारे खून या प्लैटलेट्स की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले डेंगू का नाम आता है। हम सब यही सोचते हैं कि प्लैटलेट्स का गिरना ही सबसे बड़ी आफत है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में प्लैटलेट्स का जरूरत से ज्यादा बढ़ जाना भी एक बीमारी है? नेशनल हार्ट, लंग और ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के अनुसार, खून में प्लैटलेट्स का संतुलन बिगड़ना प्लैटलेट डिसऑर्डर कहलाता है। आइए समझते हैं कि यह समस्या क्यों और कब होती है।
हमारे खून के अंदर छोटे-छोटे सेल्स होते हैं, जिन्हें हम प्लैटलेट्स कहते हैं। इनका सबसे मुख्य काम चोट लगने पर बहते हुए खून को रोकना और वहां थक्का (Clot) जमाना होता है। आम तौर पर एक इंसान के शरीर में डेढ़ लाख से चार लाख के बीच प्लैटलेट्स होने चाहिए। लेकिन जब इनकी संख्या चार लाख से पार हो जाती है, तो खून गाढ़ा होने लगता है। ऐसे में नसों के अंदर ही खून के थक्के जमने का डर रहता है, जो दिल और दिमाग के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है।
1. हड्डियों की अपनी गड़बड़ी (प्राइमरी थ्रोम्बोसिथेमिया)- हमारा खून हड्डियों के अंदर मौजूद बोन मैरो में बनता है। कभी-कभी बिना किसी बाहरी बीमारी के, यह बोन मैरो खुद से ही बहुत ज्यादा प्लैटलेट्स बनाने लगता है। ऐसा क्यों होता है, इसका पक्का कारण तो नहीं पता, लेकिन कुछ मामलों में यह जीन की खराबी की वजह से हो सकता है।
2. किसी दूसरी बीमारी का असर (सेकेंडरी थ्रोम्बोसाइटोसिस)- इसमें शरीर की किसी और परेशानी की वजह से प्लैटलेट्स बढ़ने लगते हैं। जैसे ही वह असली बीमारी ठीक होती है, प्लैटलेट्स का स्तर भी अपने आप सामान्य हो जाता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, प्लैटलेट डिसऑर्डर के लक्षण निम्न हैं;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
20 Jun 2026, 4:45 PM IST
Published on:
20 Jun 2026, 4:44 PM IST
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