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क्या आप हकलाते हैं, अगर हां तो आपके बड़े काम के हैं ये आयुर्वेदिक नुस्खे

हकलाने के रोग में व्यक्ति को हर शब्द में तो नहीं पर कुछ शब्दों को बोलने में परेशानी होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो अब आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है बस ये आसान उपाय आजमाएं...

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Sangeeta Chaturvedi

Nov 16, 2015


हकलाने के रोग में व्यक्ति को हर शब्द में तो नहीं पर कुछ शब्दों को
बोलने में परेशानी होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो अब आपको
परेशान होने की जरुरत नहीं है बस ये आसान उपाय आजमाएं...


सिर
पर 30 से 40 मिनट तक गुनगुने ब्राह्मी तेल से मालिश करें। उसके बाद गुनगुने
पानी से नहा लें। इससे स्मरण शक्ति में सुधार होता है और अटककर और हकला कर
बोलने का दोष मिट जाता है। इसके अलावा एक चम्मच सारस्वत चूर्ण और 1/2
चम्मच ब्राह्मी किरुथम शहद में मिला दें। इस मिश्रण को चावल के गोलों में
मिलाकर मुंह में रखकर अच्छी तरह से चबाने से हकलाहट में लाभ मिलता है।
बेहतर होगा अगर आप इसका सेवन नाश्ते के रूप में चटनी की तरह करें।





गाय
का घी हकलाहट को दूर करने में कारगर है। इसी तरह कोथमीर के बीज और पाम
कैंडी वल्लाराई के पत्तों में रखकर चबाने से हकलाहट दूर हो जाती है।
वल्लाराई के पत्तों को धूप में सुखाकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को लेने से
भी शब्द सही निकलने लगते हैं। सुबह एक चम्मच सूखे आंवले का पाउडर और एक
चम्मच देसी घी का सेवन करने से भी हकलाहट में लाभ मिलता है।





बादाम
भी इस रोग को दूर करने में सहायक है। बादाम रात में भिगो दें। सुबह छिलके
उतार कर पीस लें। इस मिश्रण को सेवन मक्खन के साथ करें। बादाम और काली
मिर्च मिश्री के साथ पीस कर लेने से भी लाभ मिलता है।





सोने
से पहले छुआरे खाएं। इसके बाद पानी न पीएं। इससे आवाज भी साफ होगी और
हकलाहट भी दूर हो जाएगी। शहद को हकलाहट दूर करने के लिए रामबाण माना जाता
है। शहद चाटने से शब्द सही निकलते हैं।





यह
उपाय भी करके देखें। सूर्य की तरफ पीठ करके एक आईना पकड़ कर बैठे। रोशनी
आईने पर पडऩी चाहिए। उसमें मुंह खोलकर देखें। सूर्य की रोशनी से होकर आपके
मुंह जानी चाहिए।


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हकलाहट
दूर करने के लिए स्‍पीच थेरेपी सबसे कारगर होती है। इसमें बच्‍चे या
व्‍यक्ति को सही तरीके से शब्‍दों का उच्‍चारण करना सिखाया जाता है।
काउंसलर इसके लिए कई सॉफ्टवेयर का इस्‍तेमाल भी करते हैं।






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आपको
जानकर आश्‍चर्य होगा कि हेयरिंग एड से बोलने की क्षमता में सुधार होता है।
इस प्रक्रिया में व्‍यक्ति की आवाज को रिकॉर्ड कर लिया जाता है और जब वह
बोलेगा तो उसे वही आवाज सुनाई जाएगी। इससे हकलाहट में धीरे-धीरे कमी आती
है।

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