
हार्ट समस्या से पीड़ित महिला की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)
Soft Plaque Heart Attack: आजकल हम अक्सर सुनते हैं कि कोई व्यक्ति पूरी तरह फिट था, जिम जाता था, रोज वॉक करता था और अचानक उसे साइलेंट हार्ट अटैक आ गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ऐसे मामलों में मरीजों को पहले से छाती में दर्द या घबराहट जैसे कोई पारंपरिक लक्षण भी महसूस नहीं होते।
आखिर बिना किसी लक्षण के अचानक आ रहे इन हार्ट अटैक के पीछे की असली वजह क्या है? डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल गोरखपुर में तैनात सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रोहित गुप्ता के मुताबिक, इस जानलेवा साइलेंट अटैक के पीछे का असली विलेन 'सॉफ्ट प्लाक' (Soft Plaque) है, जो हमारे दिल की नसों में चुपचाप बैठ कर एक टाइम बम की तरह काम कर रहा है।
आमतौर पर लोग मानते हैं कि हार्ट अटैक तब आता है जब नसों में कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे जमा होकर उन्हें 80 या 90 फीसदी तक ब्लॉक कर देता है। ऐसे सख्त ब्लॉक को हार्ड प्लाक कहते हैं, जिसके होने पर सीढ़ियां चढ़ने या भारी काम करने पर सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रोहित गुप्ता बताते हैं कि सॉफ्ट प्लाक (Soft Plaque) बिल्कुल अलग है। यह नसों के अंदरूनी हिस्से में जमा होने वाला एक वसायुक्त (Fatty), नरम और बेहद कमजोर जमाव होता है। यह अक्सर नसों को केवल 20 से 30 प्रतिशत ही ब्लॉक करता है, इसलिए खून का बहाव सामान्य बना रहता है और रूटीन में मरीज को कोई लक्षण या तकलीफ महसूस नहीं होती।
खतरा तब होता है जब अचानक किसी शारीरिक या मानसिक तनाव, हाई ब्लड प्रेशर या सूजन (Inflammation) के कारण यह कमजोर सॉफ्ट प्लाक अंदर ही अंदर फट (Rupture) जाता है। जैसे ही यह फटता है, शरीर वहां खून के रिसाव को रोकने के लिए तुरंत ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) बना देता है। यह क्लॉट कुछ ही सेकंडों में नस को 100% ब्लॉक कर देता है, जिससे बिना किसी चेतावनी के अचानक एक गंभीर हार्ट अटैक आ जाता है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि उनका ईसीजी (ECG) या टीएमटी (TMT/ट्रेडमिल टेस्ट) नॉर्मल है, तो उनका दिल पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन डॉ. रोहित गुप्ता इस भ्रम को दूर करते हुए सचेत करते हैं कि ईसीजी और टीएमटी जैसे पारंपरिक टेस्ट केवल तब गड़बड़ी पकड़ पाते हैं जब नसों में ब्लॉकेज कम से कम 70% या उससे अधिक हो। चूंकि सॉफ्ट प्लाक नसों को बहुत कम घेरता है, इसलिए यह इन रूटीन टेस्टों में पूरी तरह छिप जाता है और रिपोर्ट बिल्कुल नॉर्मल आती है।
अगर पारंपरिक टेस्ट फेल हो जाते हैं, तो इस छिपे हुए खतरे को कैसे पहचाना जाए? डॉ. रोहित गुप्ता ने उन एडवांस और आधुनिक मेडिकल टेस्ट्स के बारे में बताया है जो सॉफ्ट प्लाक को समय रहते डिटेक्ट कर सकते हैं:
सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी (CT Coronary Angiography): यह इस समय सबसे सटीक नॉन-इनवेसिव टेस्ट है। इसमें बिना किसी कैथेटर के, सीटी स्कैन के जरिए दिल की नसों की 3D इमेज ली जाती है। यह टेस्ट न केवल नसों के शुरुआती ब्लॉकेज को दिखाता है, बल्कि यह भी साफ-साफ बता देता है कि नस में जमा प्लाक हार्ड (कैल्शियम युक्त) है या खतरनाक सॉफ्ट प्लाक है।
कैल्शियम स्कोरिंग (Coronary Artery Calcium Scan): यह टेस्ट नसों में कैल्शियम की मात्रा को मापता है। हालांकि यह सीधे सॉफ्ट प्लाक को नहीं दिखाता, लेकिन अगर स्कोर असामान्य आता है, तो यह भविष्य में होने वाले कार्डियक अरेस्ट या सॉफ्ट प्लाक के खतरे का शुरुआती संकेत दे देता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
27 May 2026 03:22 pm
Published on:
27 May 2026 03:21 pm
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