2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सात चक्रों का रहस्य: जानिए कैसे ये आपके जीवन ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं

शरीर में ऊर्जा का केन्द्र बिंदु सात चक्रों को माना जाता है। इनसे जीवन ऊर्जा प्रवाहित होती है। जब ये संतुलन में होते हैं

2 min read
Google source verification
Seven Chakras of life

Seven Chakras of life

शरीर में ऊर्जा का केन्द्र बिंदु सात चक्रों को माना जाता है। इनसे जीवन ऊर्जा प्रवाहित होती है। जब ये संतुलन में होते हैं तो जीवन ऊर्जा उनके माध्यम से आगे बढ़ने और आसपास की दुनिया से जोड़ने में सक्षम होती है। इन्हें सूक्ष्म ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है, जो अंगों, मन और बुद्धि को सर्वोत्तम स्तर पर काम करने में मदद करते हैं।

1. मूलाधार चक्र

यह पहला चक्र है जिसे रीढ़ की हड्डी के आधार पर स्थित माना जाता है। यह लाल रंग और पृथ्वी तत्त्व से जुड़ा हुआ है। यह शरीर के दाएं-बाएं हिस्से में संतुलन बनाने व अंगों का शोधन करने का काम करता है।

2. स्वाधिष्ठान चक्र

यह जननेंद्रिय के ठीक ऊपर होता है। जल तत्त्व का प्रतिनिधित्व करता है। पुरुषों में टेस्टीज और महिलाओं में अंडाशय की कार्यप्रणाली को सुचारू रखता है। प्रजनन प्रणाली के साथ हार्मोन के स्राव को नियंत्रित करता है।

3. मणिपूरक चक्र

यह नाभि के पास स्थित होता है और पीले रंग से जुड़ा होता है। यह आत्म-सम्मान, आत्मविश्वास और शक्ति से जुड़ा होता है।

4. अनाहत चक्र

यह हृदय के केंद्र में स्थित होता है और हरे रंग से जुड़ा होता है। यह प्रेम, करुणा और सहानुभूति से जुड़ा होता है

5. विशुद्धि चक्र

यह कंठ के गड्ढे में स्थित होता है। यह बेसल मेटाबॉलिक रेट को संतुलित रखता है। पूरे शरीर को शुद्ध करता है। थायरॉइड ग्रन्थि को नियंत्रित रखता है। यह बोलने, सुनने और खुद को व्यक्त करने की क्षमता को नियंत्रित करता है।

6. आज्ञा चक्र

यह दोनों भौंहों के बीच होता है। मानसिक स्थिरता व शांत रखता है। यह दिमाग की सभी कार्य प्रणाली को नियंत्रित रखता है। ज्ञानचक्षुओं को खोलता है। पीयूष ग्रन्थि, जो पूरे शरीर को नियंत्रित रखती है उसे संतुलित रखता है।

यह करें - इसके संतुलन के लिए हलासन, सेतुबंधासन और सर्वांगासन प्राणायाम करना लाभकारी होता है।

7. सहस्रार चक्र

इसे ब्रह्मरंध्र भी कहते हैं। सिर की सबसे ऊपरी जगह पर होता है। आध्यात्मिकता, ज्ञान और ऊर्जावान विचारों का स्थान है। शेष सभी चक्रों के जाग्रत होने पर यह चक्र स्वत: ही जाग्रत हो जाता है।

- डॉ. गुंजन गर्ग, आयुर्वेदाचार्य