Hidden Heart Risks: टाइप 2 डायबिटीज से जूझ रही महिलाओं में दिल की छिपी समस्याएं सामने आ रही हैं। एक नए अध्ययन ने बिना लक्षण वाले हृदय जोखिमों को उजागर कर सभी को चौंका दिया है।आइए जानते हैं क्या है यह ‘हिडन हार्ट रिस्क’? इस नए रिसर्च में क्या-क्या खुलासे हुए हैं?
Hidden Heart Risks: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में महिलाएं घर, ऑफिस और समाज की कई जिम्मेदारियों को निभा रही हैं। लेकिन इस सबके बीच एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती चुपचाप उनके शरीर में दस्तक दे रही है, टाइप 2 डायबिटीज।
अक्सर लोग इस बीमारी को सिर्फ बढ़े हुए ब्लड शुगर तक ही सीमित मानते हैं, मगर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने इस सोच को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीसेस्टर में हुए एक हालिया अध्ययन के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं के दिल को पुरुषों की तुलना में लगभग दो गुना अधिक नुकसान पहुंच रहा है, वो भी बिना किसी लक्षण के। न सीने में दर्द, न सांस लेने में दिक्कत, फिर भी उनका दिल अंदर ही अंदर प्रभावित हो रहा है।आइए जानते हैं क्या है ये 'हिडन हार्ट अटैक?
यह शोध NIHR Leicester Biomedical Research Centre में किए गए चार गहन अध्ययनों पर आधारित है। इनमें ऐसे मरीज शामिल थे जिनमें हृदय रोग के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे, लेकिन उन्नत MRI स्कैन ने उनके दिल की ‘छिपी हुई क्षति’ को सामने ला दिया।यह अध्ययन न केवल डायबिटीज की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि महिलाओं के लिए यह बीमारी किस तरह ‘साइलेंट थ्रेट’ बनकर उभर रही है।
इस अदृश्य खतरे का नाम है Coronary Microvascular Dysfunction (CMD)। यह दिल की उन बारीक रक्तवाहिकाओं को प्रभावित करता है, जो सामान्य जांच में नहीं दिखतीं।CMD को "early silent heart damage" भी कहा जाता है और यह हार्ट फेल्योर की ओर पहला कदम हो सकता है।
इस शोध में पाया गया कि 46% महिलाएं, जिन्हें टाइप 2 डायबिटीज थी, उनमें CMD के संकेत मिले। वहीं केवल 26% पुरुषों में ये लक्षण पाए गए। यह साफ इशारा करता है कि महिलाओं के दिल, डायबिटीज के प्रभाव को पुरुषों की तुलना में कहीं गहराई से झेलते हैं और वो भी बिना किसी बाहरी लक्षण के।
इस रिसर्च से जुड़े डॉक्टर गौरव गुल्सिन का कहना है कि पुरुषों और महिलाओं में दिल की बीमारी (CMD) के कारण अलग-अलग होते हैं।स्टडी में सामने आया कि महिलाओं में इसका सबसे बड़ा कारण मोटापा (उच्च BMI) था, जबकि पुरुषों में यह ज्यादातर हाई ब्लड प्रेशर की वजह से होता है।यह फर्क बताता है कि हृदय रोगों की रोकथाम और इलाज के लिए महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग जांच और उपचार रणनीतियां अपनाना जरूरी है।
NIHR Leicester BRC की डायरेक्टर और डायबिटीज मेडिसिन की प्रोफेसर मेलानी डेविस CBE ने इस अध्ययन को एक बेहतरीन उदाहरण बताया कि कैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ मिलकर गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि यह रिसर्च BRC की सोच और उसके उद्देश्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।अध्ययन से यह भी साबित होता है कि अगर CMD की पहचान शुरुआत में ही हो जाए, तो भविष्य में हार्ट फेल्योर जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।इसके लिए जरूरी है किमहिलाओं में वजन नियंत्रण और स्वस्थ जीवनशैली को प्राथमिकता दी जाए।पुरुषों में नियमित ब्लड प्रेशर जांच और उसका नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।