अब इन तीन राशियों पर रखेंगे शनि साढ़े साती की नजर, जानिये किस राशि पर पड़ेगा क्या असर

शनिदेव की टेड़ी निगााह से बचाएंगे ये उपाय...

By: दीपेश तिवारी

Published: 24 May 2020, 08:30 AM IST

ज्योतिष में न्याय के देवता शनिदेव माने गए हैं। शनि ग्रह, कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है। इन प्रभावों का असर हमारे प्रत्यक्ष जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष में शनि एक क्रूर ग्रह है, परंतु यदि शनि कुंडली में मजबूत होता है तो जातकों को इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं जबकि कमज़ोर होने पर यह अशुभ फल देता है।

वहीं ज्योतिष के जानकारों की मानें तो इस समय शनि कोरोना के प्रमुख कारक ग्रह कहे जा रहे, वहीं शनि 11 मई 2020 से 29 सितंबर 2020 तक मकर राशि में वक्री अवस्था में गोचर करेंगे। जबकि वर्ष 2020 में ही शनि 27 दिसंबर को अस्त भी हो जाएंगे। शनि के अस्त होने के साथ ही उनके प्रभाव कुछ कम हो जाएंगे। इससे पहले धनु और मकर राशि में पहले से ही शनि की साढ़े साती का प्रभाव चल रहा था, ऐसे में अब कुम्भ राशि पर भी शनि की साढ़े साती का पहला चरण शुरू है।

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ज्योतिष के जानकारों के अनुसार चूंकि शनि मकर और कुम्भ दो राशियों के स्वामी हैं। ऐसे में शनि की दो राशियों में से एक राशि मकर में शनि का गोचर हो रहा है, जबकि शनि की दूसरी राशि कुम्भ शनि की स्व-राशि और मूल त्रिकोण राशि है। शनि की मकर राशि में वक्री चाल केवल मकर राशि वालों को ही नहीं बल्कि सभी 12 राशियों पर अपना विशेष असर छोड़ेगी।

लेकिन शनि की ये चाल हर किसी को परेशान ही नहीं करेगी। जानकारों का कहना है कि अगर आपकी कुंडली में शनि मजबूत स्थिति में हैं तो शनि की वक्री चाल आपको कष्ट नहीं देगी। वहीं ज्योतिष के जानकारों का ये भी कहना है कि शनि के इस गोचर का सभी के व्यवसाय, नौकरी, विवाह, प्रेम, संतान, शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ेगा।

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1. मेष राशि :
आपकी राशि में शनि इस समय कर्म भाव यानि दशम भाव में ही गोचर करेंगे। शनि आपके दशम और एकादश भाव का स्वामी है। इस गोचर में आपके लिए मेहनत और संघर्ष बहुत बढ़ जाएंगे। शनि के वक्री होने की वजह से नए काम में रुकावट आ सकती है और जिस लाभ की आशा कर रहे थे वह भी समय से नहीं मिल पाएगा। घर से जुड़े किसी कार्य में धन का खर्च हो सकता है।

उपाय: महाराज दशरथ कृत नील शनि स्तोत्र का पाठ करें व शनिवार को शाम के समय पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक रखें।

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2. वृषभ राशि :
शनि का आपके नवम भाव यानि भाग्य स्थान में गोचर रहेगा। ऐसे में पिता के साथ कुछ मतभेद हो सकते हैं। आप अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। कार्य-स्थल में मेहनत अधिक होने के बावजूद लाभ के आसार कम नजर आ रहे हैं। इस समय सब्र और धैर्य से ही काम करें तो बेहतर रहेगा। शनि का ये गोचर अभी प्रमोशन में और इंतजार करवाएगा।

उपाय: शनि मंत्र का जाप करें।


3. मिथुन राशि :
अष्टम भाव यानि आयु भाव में शनि का प्रभाव अचानक ही परेशानियों को बढ़ा सकता है। साथ ही इस दौरान आर्थिक स्थिति भी कुछ कमजोर होती नजर आ रही है। धन से जुड़े कार्य में भी ये शनि आय व लाभ में कमी करेगा। शनि का ये गोचर आपको कभी-कभी भ्रमित सा महसूस कराएगा। कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय किसी सीनियर की सलाह अवश्य लें या निर्णय कुछ समय के लिए टाल दें तो बेहतर रहेगा।

उपाय: शनिवार या फिर शनि प्रदोष का व्रत रखें, साथ ही शनिवार के दिन काले कपड़े पहनने से बचें।

4. कर्क राशि :
कर्क राशि से सप्तम भाव यानि विवाह भाव में ही शनि गोचर करेंगे। ऐसे में किसी महिला मित्र की वजह से आपको फायदा होगा। इस समय आलस को अपने से दूर ही रखें, क्योंकि आलसी लोगों को शनि शुभ फल नहीं देते हैं। इस समय बीमारी परेशान कर सकती है। वाद-विवाद से बचें अन्यथा आपका धन खर्च हो सकता है।

उपाय: हर शनिवार को सरसों का तेल किसी लोहे या मिट्टी के बर्तन में भरकर उसमें अपनी शक्ल देखकर छाया पात्र दान करें।

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5. सिंह राशि :
इस दौरान आपके छठे भाव यानि शत्रु व रोग भाव में शनि का गोचर रहेगा। ऐसे में यदि आप जमीन में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो बहुत ही सोच-समझ कर करें, नहीं तो वर्ष के मध्य में आपके साथ धोखा हो सकता है। किसी अच्छे पद की चाहत में जल्दबाजी न करें। स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

उपाय: शनिवार के दिन साबुत काली उड़द का दान करने के अलावा पीपल वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दीपक शाम को जलाएं।

6. कन्या राशि :
आपके पांचवे भाव यानि बुद्धि भाव में शनि का गोचर रहेगा। ऐसे में आप रुकी हुई शिक्षा को दोबारा शुरू कर सकते हैं या किसी शोध में भी किस्मत आजमा सकते हैं। शनि की स्थिति आपकी सोच को गंभीर बना देगी, जिससे आप बहुत ही गहराई में जा कर कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। इस समय आप आभूषण भी खरीद सकते हैं। वहीं वाहन और घर से जुड़े खर्चे के लिए साल के मध्य का समय बेहतर नहीं है।

उपाय: शनि प्रदोष का व्रत रखें।

7. तुला राशि :
शनि आपके चतुर्थ भाव यानि सुख व माता के भाव में गोचर करेंगे। ऐसे में व्यापार में शनि नए अवसर देगा, लेकिन किसी तरह का अहम आपके लिए नुकसान का कारण भी बन सकता है। किसी के कहने से कोई बड़ा निवेश न करें और न ही वर्ष के मध्य में भूमि में निवेश के बारे में सोचें। शनि के वक्री होने से माता से भी किसी तरह का मतभेद होने की संभावना है। वहीं इस वजह से आपको मानसिक रूप से भी कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।

उपाय: किसी जानकार की सलाह पर रत्न धारण करें।

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8. वृश्चिक राशि :
इस समय शनि आपके तृतीय भाव में यानि पराक्रम भाव में गोचर करेंगे। ऐसे में यदि आप कोई नया काम करने की सोच रहे हैं तो यह समय कार्य के लिए बेहतर रहेगा। आर्थिक स्थिति भी सामान्य बनी रहेगी और कार्य में आर्थिक स्थिति को लेकर कोई रुकावट नहीं आएगी। इस दौरान किसी मित्र की सहायता से आपके रुके काम सुचारू रूप से बनने लगेंगे, लेकिन उसी मित्र के साथ किसी नए काम की शुरुआत न करें।

उपाय: शनिवार के दिन चीटियों को आटा डालें।

9. धनु राशि :
इस समय शनि आपके द्वितीय भाव में यानि धन भाव में गोचर करेंगे। इस समय कोई भी नया कार्य पूरी तरह से ध्यान लगा कर ही शुरू करें, तभी यह शनि आपको सफलता दिलाएगा। शनि की साढ़े-साती का आखिरी चरण होने से ये शनि जाते-जाते आपको सोने की तरह तपाकर उजला बना देगा। आपका कोई काम नही रुकेगा, वहीं जमीन से जुड़ा कोई फायदा ये शनि आपको दे सकता है।

उपाय: आपको शनिवार के दिन किसी काले कपड़े अथवा काले धागे में धतूरे की जड़ धारण करें।

10. मकर राशि :
यह गोचर आपके प्रथम भाव यानि लग्न में होगा। ऐसे में इस गोचर से मानसिक परेशानी तो बनी रहेगी पर शनि के अपनी ही राशि में गोचर करने से इस मानसिक तनाव से लड़ने की प्रेरणा भी यही शनि देगा। इस गोचर से आपकी निर्णय शक्ति में संतुलन और गहराई आएगी और आपको अपनी नई मंजिल मिलेंगी। आर्थिक स्थिति में भी लाभ बना रहेगा।

उपाय: शनिदेव की आराधना भी करें।

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11. कुम्भ राशि :
इस समय शनि का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव यानि व्यय भाव में रहेगा। इसके चलते आपकी राशि के जातकों के लिए इस समय में संघर्ष व मेहनत बढ़ जाएगी और आपको अपनी जिंदगी की हकीकत पता चलेगी। इस समय में आपके अपने दूर जाने लगेंगे और कुछ ऐसे रिश्ते करीब आएंगे, जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं था। नौकरी को बदलने के लिए समय बेहतर नहीं है।

उपाय: शनि देव के बीज मंत्र 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' का जाप करें.

12. मीन राशि :
इस दौरान शनि का गोचर आपकी राशि से ग्यारहवें भाव यानि आय भाव में रहेगा। ऐसे में अपने पर आलस को हावी न होने दें नहीं तो बहुत ही महत्वपूर्ण अवसरों से वंचित रह जाएंगे। इस समय व्यापार से जुड़े बहुत से नए अवसर आएंगे और आपको आगे बढ़ने का का मौका मिलेगा। आप कुछ नया कर दिखाएंगे, समाज में भी आपकी नई पहचान बनेगी। सेहत के हिसाब से यह गोचर बेहतर रहेगा। आपकी आर्थिक स्थिति में भी आपको माता-पिता से मदद मिलेगी।

उपाय: शनिवार के दिन शुभ शनि यंत्र की पूजा करें।

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