जल्द लग रहे तीन बड़े ग्रहण, जानिए कदम दर कदम कैसे बदलेगा समय

ग्रहों की ये चाल मचेगी हाहाकार!

कोरोना संकट से इस समय कुछ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जूझ रही है। ऐसे में सामने आ रहे इसके प्रभावों के कारण जहां कई देशों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ाना शुरू हो गई है। वहीं लगातार लॉकडाउन से जूझ रही तकरीबन हर देश की जनता अब इससे आजादी चाहती है। साथ ही सभी लोग कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से निपटने के लिए उपाय जानना चाहते हैं।

ऐसे में ज्योतिष आंकलनों में आशा की जा रही है कि 21 जून 2020 को लगने वाले सूर्य ग्रहण के बाद वायरस का प्रकोप कुछ कमी आ सकती है। वहीं ज्योतिष के जानकारों के अनुसार मंगल के मकर से कुम्भ राशि में प्रवेश के साथ ही मकर राशि में मंगल-शनि-गुरु की युति भंग होने के साथ ही राहत मिलने की उम्मीद का आकलन करना शुरू हो गया। लेकिन अब ज्योतिष के कई जानकार ये खुद मान रहे हैं कि यह राहत इतनी बड़ी भी नहीं होगी कि कोरोना पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। दरअसल इस पूरे समीकरण में ग्रहों का गोचर कुछ अलग ही संकेत दे रहे हैं।

एक के बाद एक तीन बड़े ग्रहण
जून और जुलाई के पहले ही सप्ताह में 2 चन्द्र ग्रहण लग रहे हैं, वहीं, 21 जून के दिन सूर्य ग्रहण लग रहा है। इसमें दोनों चन्द्र ग्रहण उपछाया होंगे, जो 05 जून की रात और 5 जुलाई को लग रहे हैं। वहीं कंकणाकृति सूर्य ग्रहण 21 जून के दिन लगेगा। 21 जून को आषाढ़ मास की अमावस्या, मृगशीर्ष नक्षत्र, मिथुन राशि में होने वाले इस सूर्य ग्रहण 12 मिनिट से अधिक नहीं दिखाई देगा। यह ग्रहण भारत, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका के कुछ शहरों में दिखाई देगा।

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ऐसे समझें इन ग्रहणों को...
05 जून 2020 चंद्र ग्रहण : 05 जून की रात्रि को 11 बजकर 16 मिनट से 6 जून को 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, ये उपच्छाया ग्रहण होगा। ये ग्रहण भारत, यूरोप, अफ्रीक, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा, उपच्छाया चंद्र ग्रहण होने के कारण सूतक काल का प्रभाव कम रहेगा।

21 जून 2020 सूर्य ग्रहण : 21 जून की सुबह 9 बजकर 15 मिनट से दोपहर 15 बजकर 04 मिनट तक रहेगा, यह वलयाकार सूर्य ग्रहण रहेगा। दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर इस ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव रहेगा। इसे भारत समेतदक्षिण पूर्व यूरोप, हिंद महासागर, प्रशांत महासागर, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के प्रमुख हिस्सों में देखा जा सकेगा।

05 जुलाई 2020 चंद्र ग्रहण : सुबह 08 बजकर 38 मिनट से 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगा, ये उपच्छाया ग्रहण होगा। जिसके कारण इसका प्रभाव भारत में बहुत कम रहेगा। इस दिन लगने वाला ग्रहण अमेरिका, दक्षिण-पश्चिम यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्से में दिखाई देगा।

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ग्रहणों का प्रभाव ऐसे समझें...

शास्त्रों के अनुसार एक माह के मध्य दो या दो से अधिक ग्रहण लगता हैं तो राजा को कष्ट, सेना में विद्रोह, गम्भीर आर्थिक समस्या, जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। वहीं यदि यह स्थिति आषाढ़ माह में बने, तो आजीविका पर मार और कई देशों को नुक्सान के योग बनते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि तीनों ग्रहण का प्रभाव विश्व के लिए काफी नुक्सान दायक साबित हो सकता है। वहीं चीन को लेकर वैश्विक स्तर पर कोई कठोर निर्णय पूरे विश्व को शीत युद्ध की ओर ले जा सकता है। ऐसे में कुल मिलाकर जो बातें सामने आ रही हैं उनके अनुसार जून-जुलाई में कोरोना वायरस से अधिक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता रहेगी, वहीं अमेरिका-चीन के मध्य मतभेदों को लेकर कुछ बड़ी परेशानियां विश्व के सामने खड़ी हो सकती हैं।

कब लगेगा सूर्य ग्रहण
यह ग्रहण उत्तरी राजस्थान, पंजाब, उत्तरी हरियाणा, उत्तराखंड के कुछ भागों में दिखाई देगा. सूर्य ग्रहण 10.10, मध्य 11.51 और मोक्ष (समाप्ति) दोपहर 01.42 पर होगा। ग्रहण का सूतक 20 जून 2020 की रात 10.10. पर प्रारंभ हो जाएगा।

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इन राशियों पर पड़ेगा ग्रहण का सर्वाधिक प्रभाव
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इन लगातार पडत्रने वाले ग्रहणों के प्रभाव विभिन्न राशियों पर पड़ेंगे। जिसके चलते जहां ये मेष, सिंह, कन्या और मकर राशि के लिए शुभ होते दिखाई दे रहे हैं। वहीं मिथुन, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के लिए यह ग्रहण अशुभ प्रभाव दिखा सकता है। जबकि वृषभ, तुला, धनु और कुम्भ राशि के लिए यह ग्रहण मिश्रित असर देगा।

चेतावनी : ग्रहों की ये चाल मचाएगी हाहाकार!...
वहीं ज्योतिष के जानकार पंडित सुनील शर्मा की मानें तो आने वाले कुछ समय में एक के बाद एक पांच ग्रह अपनी चाल बदल कर वक्री हो रहे है। यह सभी ग्रह वक्री होकर देश-विदेश में अपना कहर बरपा सकते हैं। इनमें जहां राहू मिथुन राशि में वक्री है,जबकि 13 मई से शुक्र भी वृषभ राशि में वक्री हो गये है। वही 11 मई को शनि तथा 14 मई को गुरु मकर राशि में वक्री हो गये हैं। इन चारों वक्री ग्रहों के साथ आग में घी का कार्य करने के लिए बुध 18 जून से मिथुन राशि में वक्री हो जाएंगे।

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ऐसे समझें वक्री ग्रहों का प्रभाव
यदि कोई ग्रह विपरीत यानि उल्टी गति करता है तो उसे वक्री गति कहा जाता है। इनमें जहां राहू केतू वक्री चाल ही चलते हैं। वहीं सूर्य व चंद्र कभी भी वक्री गति नहीं करते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में अधिकांश ग्रहों की वक्री गति के कारण जून-जुलाई काफी कष्टकारी हो सकते है। इस दौरान 9 में से पांच ग्रहों का वक्री होना जनजीवन को अस्त व्यस्त कर सकता है।

जिसमें से भी दो प्रमुख ग्रह शनि और गुरु का एक साथ मकर राशि में वक्री होना, पश्चिमी देशों में भरी उथल पुथल मचा सकते हैं। मकर राशि शनि की स्वराशी जबकि गुरु की नीच राशि है। ऐसे में दुनिया दोनों ग्रहों की आपसी द्वन्द की भेट चढ़ सकती है। इसके चलते विश्व की अर्थ व्यवस्था, स्टॉक मार्केट में रिकार्ड गिरावट देखने को मिल सकती है।

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यह पांचों ग्रह मुख्य रूप से तीन राशि को प्रभावित कर सकते हैं, जो हैं- वृषभ, मिथुन और मकर राशि। इसमें पूरे परिवर्तन यानि वक्री चाल में सबसे महत्वपूर्ण है बुध का अपनी ही राशि मिथुन में वक्री होना। वायु तत्व राशि मिथुन में बुध के वक्री होने से संक्रामकता अपने चरम स्तर पर पहुंच सकती है। वहीं इस समय ग्रह की ये चाल प्राकृतिक आपदा और संक्रामक बीमारी के बढ़ने की ओर भी इशारा कर रही हैं।

ग्रहण के सूतक काल में इन बातों का खास ध्यान रखें...
सूतक काल ग्रहण लगने पहले ही शुरू हो जाता है। इस समय खाने पीने की मनाही होती है, लेकिन गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्ति, छोटे बच्चों और वृद्ध लोगों पर ये नियम लागू नहीं होते हैं, साथ ही यह जरूर ध्यान रखें कि सूतक काल लगने से पहले ही भोजन में तुलसी के पत्ते जरूर डाल दें, जिससे ग्रहण काल में जरूरत पड़ने पर इसे खाने का इस्तेमाल किया जा सके। सूतक काल के समय मन ही मन में ईश्वर की अराधना करनी चाहिए। इस दौरान मंत्र जाप कर सकते हैं। वहीं सूतक काल के दौरान किसी भी स्थिति में भूलकर भी तुलसी के पौधे को छूना नहीं चाहिए।

इसके अलावा सूतक काल के समय शुभ काम और पूजा पाठ नहीं की जाती है। भगवान की मूर्ति को स्पर्श करने की भी मनाही होती है, वहीं सूतक के समय मंदिरों के कपाट बंद कर दिये जाते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए सूतक काल विशेष रूप से हानिकारक माना जाता है। जिस कारण सूतक काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।

सूतक काल में काटने छाटने का काम भी नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही प्रेगनेंट महिलाओं चाकू, ब्लेड, कैंची जैसी चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहा जाता है है कि ग्रहण के समय धार वाली वस्तुओं का प्रयोग करने से गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर इसका बुरा असर पड़ता है।

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दीपेश तिवारी
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