Coronavirus: कोरोना संक्रमित की पहली बार सामने आई ऐसी तस्वीरें, इसलिए जरूरी है मास्क पहनना

-Coronavirus: दुनिया में कोरोना ( Covid-19 Virus ) का खतरा बढ़ता जा रहा है।
-अब तक 2 करोड़ 92 लाख से ज्यादा लोग इस लाइलाज बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं।
-विभिन्न देशों में कोरोना की वैक्सीन ( Covid-19 Vaccine ) की खोज जारी है, तमाम वैज्ञानिक और डॉक्टर्स लगातार कोरोना पर रिसर्च कर रहे हैं।
-इसी बीच अब दुनिया में पहली बार कोरोना संक्रमित कोशिकाओं की तस्वीरें सामने आई हैं।

By: Naveen

Published: 14 Sep 2020, 03:38 PM IST

नई दिल्ली।
Coronavirus: दुनिया में कोरोना ( COVID-19 virus ) का खतरा बढ़ता जा रहा है। अब तक 2 करोड़ 92 लाख से ज्यादा लोग इस लाइलाज बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। जबकि, 9 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। विभिन्न देशों में कोरोना की वैक्सीन ( Covid-19 Vaccine ) की खोज जारी है, तमाम वैज्ञानिक और डॉक्टर्स लगातार कोरोना पर रिसर्च कर रहे हैं। इसी बीच अब दुनिया में पहली बार कोरोना संक्रमित कोशिकाओं की तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों के जरिए विशेषज्ञों ने कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए मास्क को भी जरूरी बताया है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसीन ( Coronavirus Infected Cells Images ) में इन तस्वीरों को रंगीन प्रकाशित किया गया है।

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पहली बार सामने आई तस्वीरें
वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में विकसित श्वसन तंत्र की कोशिकाओं को संक्रमित करने के बाद कोशिकाओं की तस्वीरें ली गई, जो कि फेफड़ों के अंदर प्रति कोशिका उत्पन्न होने वाले वायरस कणों की संख्या का वर्णन करते हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि जब कोरोना वायरस के संक्रमित शक्ल को छोड़ा गया तो तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाती है।

इसके लिए इंसान के लंग की कोशिकाओं में कोरोना वायरस को छोड़ा गया, उसके बाद उन्होंने 96 घंटे तक कोशिकाओं का अध्ययन किया। इसके लिए उन्होंने उच्च क्षमता वाली स्कैनिंग इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप तकनीक की मदद ली। इस तस्वीर में कोविड-19 के घनत्व और ढांचे का पता चलता है। तस्वीर बताती है कि मानव श्वसन तंत्र के अंदर प्रति कोशिका वाइरन की तादाद कैसे पैदा होती है और छोड़ी जाती है।

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यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना ( UNC ) चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के कैमिल एहरे सहित शोधकर्ताओं ने इन तस्वीरों को यह बताने के लिए लिया है कि श्वसन तंत्र का SARS-CoV-2 संक्रमण बहुत ही ग्राफिक और आसानी से समझी जाने वाली छवियों में कैसे हो सकता है। बता दें कि वायरल लोड तय करता है कि दूसरों तक वायरस ट्रांसमिशन की फ्रीकवेंसी कितनी है।

शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि कोरोना वायरस की तस्वीर मास्क के इस्तेमाल की अहमियत को उजागर करती है। जिससे कोविड-19 के फैलाव को रोका जा सके। तस्वीर में मानव श्वसन की सतह पर कोविड-19 के अंशों की बड़ी संख्या नजर आती है।

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