इसलिए मूर्ति के प्रति सम्मान
रामकरण की मानें तो उसके बच्चे मूर्ति का दूध पीकर ही बड़े हुए हैं। उसकी दी हुई कटड़ियां कई लाख रुपए की बिकी। जिस भैंस ने उनके परिवार के लिए इतना किया तो उसका सम्मान तो बनता है।
रामकरण ने कहा कि, जिस तरह से एक इंसान की मृत्यु होती है तो संस्कार स्वरूप जितने भी क्रियाकर्म होते हैं वो सभी मूर्ति के संस्कार में भी किये गए। जैसे परिवार में एक बुजुर्ग के सम्मान में मृत्युभोज का आयोजन किया जाता है वैसे ही भैंस मूर्ति के सम्मान में भी किया गया।