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रहस्यमयी मंदिर! यहां आज भी रहते हैं भगवान शिव, पत्थरों को छूते ही आती है डमरू की आवाज

locationनई दिल्लीPublished: Jul 18, 2022 05:10:27 pm

Submitted by:

Shaitan Prajapat

रहस्यमयी मंदिर! यहां आज भी रहते भगवान शिव, पत्थरों को छूते ही आती है डमरू की आवाज
jatoli shiv temple is know for miracle sound of damaru came from stone


देवभूमि हिमाचल में भगवान शिव के बहुत सारे मंदिर हैं। सबका अपना-अपना महत्व है। आज आपको एक ऐसे रहस्यमयी मंदिर के बारे में जहां पर पत्थरों को छूने से डमरू की आवाज सुनाई देती है। दावा किया जाता है कि यह एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है।

jatoli shiv temple
jatoli shiv temple

अपने देश में कई ऐसे मंदिर है जो पूरी दुनिया में मशहूर है। इनमें से कुछ रहस्यमयी और चमत्कारी है। आपने कई मंदिरों के बारे सुना होगा, आज आपको एक रहस्यमयी मंदिर के बारे में बता रहे है जहां आज भी भगवान शिव बसते है। ये शिव धाम देखने में जितना खूबसूरत है यहां की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। सबसे खास बात यह है कि यहां पर पत्थर को थपथाने पर डमरू जैसी आवाज निकली है। यह अनोखा मंदिर देवभूमि हिमाचल में स्थित है। इस मंदिर को लेकर दावा किया जाता है कि यह एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। यह हिमाचल के सोलन में जटोली शिव मंदिर स्थित है। आइए जानते इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में।

मंदिर में आज भी बसते हैं भगवान शिव
भक्तों का कहना है कि डमरू की आवाज भगवान शिव की मौजूदगी को दर्शाता है। यही वजह है कि भोलेनाथ के इस दर पर आने से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता। उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह मंदिर देवभूमि के नाम से मशहूर है। यह हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित है। मंदिर की ऊंचाई लगभग 111 फुट है और यह दक्षिण-द्रविड़ शैली में बना हुआ है। मंदिर की खूबसूरती और कलात्मकता को देख हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है।

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बनने में लगे थे 39 साल
बताया जाता है कि पौराणिक काल में भगवान शिव इस जगह आए थे और कुछ समय के लिए उन्होंने इसे अपना निवास स्थान बनाया था। बाद में 1950 के दशक में स्वामी कृष्णानंद परमहंस नाम के एक बाबा यहां आए और जटोली शिव मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराने का निर्णय लिया। साल 1974 में उन्होंने इस मंदिर की नींव रखी थी।

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दूर दूर से दर्शन के लिए आते है भक्त
हालांकि, साल 1983 में उन्होंने समाधि ले ली, लेकिन मंदिर का निर्माण कार्य रूका। मंदिर कमेटी ने उनके इस अधूरे सपने को पूरा किया। यहां दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मन्नतों के पूरा होने की अर्जी लगाते हैं।

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