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100 साल बाद खिला ‘लिपस्टिक वाला फूल’, पहली बार 1912 में वैज्ञानिकों ने की थी खोज!

भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के शोधकर्ताओं को 100 साल से भी ज्यादा समय के बाद अरुणाचल प्रदेश में एक दुर्लभ पौधा मिला है। जिसे कभी 'भारतीय लिपस्टिक पौधा' कहा जाता था। इस पौधे का वैज्ञानिक नाम Aeschynanthus monetaria Dunn है, लेकिन इसे आम भाषा में भारतीय लिपस्टिक (Indian Lipstick Plant) का पौधा भी कहा जाता है।

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Aeschynanthus monetaria Dunn

Aeschynanthus monetaria Dunn

आमतौर पर फूलों को खुशबू हर किसी को पसंद होती है। कुछ लोग गर्लफ्रेंड को प्रपोज करने के लिए तो घरों सजाने के लिए इसके अलावा अपनी पंसदीदा टीचर्स को खुश के लिए फूलों का इस्तेमाल करते है। इस धरती पर कई प्रकार के फूल पाए जाते है। जिनमें कमल, गुलाब से लेकर जैस्मिन तक अनेकों है जिसनकी गणना करना मुश्किल है। आज आपको एक ऐस फूल के बारे में बताने जा रहे है जो 100 साल बाद खिला है। इस फूल का नाम 'लिपस्टिक वाला फूल' है। वैज्ञानिकों की भाषा में इस पौधे को एस्किनैन्थस मोनेटेरिया डन (Aeschynanthus monetaria Dunn) कहा जाता है। आइए जानते इस दुलर्भ फूल के बारे में।

एक सदी के बाद आया नजर
बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से एक बार फिर ये पौधा अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ ज़िले में मिला है। एस्किनैन्थस मोनेटेरिया डन को आम भाषा में भारतीय लिपस्टिक (Indian Lipstick Plant) के पौधे के नाम जाना जाता है। यह फूल दिखने में लिपस्टिक जैसा है। बताया जाता है ये पौधा एक सदी के बार दोबारा दिखाई दिया है।

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1912 में पहली बार हुई थी खोज
एक रिपोर्ट के अनुसार, एस्किनैन्थस मोनेटेरिया डन की पहचान पहली बार ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री स्टीफन ट्रॉयट डन ने साल 1912 में की थी। यह खोज एक अन्य वनस्पतिशास्त्री इसहाक हेनरी बर्किल द्वारा अरुणाचल प्रदेश से इकट्ठे किए गए पौधों के नमूनों के आधार पर की गई थी। इस बारे में 'करंट साइंस जर्नल' में बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वनस्पतिशास्त्री कृष्णा चौलू का एक लेख भी छपा। BSI वैज्ञानिक कृष्णा चौलू ने शोध के बारे में ‘करंट साइंस जर्नल’ में पब्लिश आर्टिकल में लिखा कि ट्यूबलर रेड कोरोला की उपस्थिति के कारण, जीनस एस्किनैन्थस के तहत कुछ प्रजातियों को लिपस्टिक प्लांट कहा जाता है।

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अक्टूबर से जनवरी के बीच खिलते हैं फूल
कृष्णा चौलू ने अरुणाचल प्रदेश में फूलों के अध्ययन के दौरान बीते साल दिसंबर में अंजॉ जिले के ह्युलियांग और चिपरू से ‘एस्किनैन्थस’ के कुछ नमूने जमा किए थे। यह पौधा नमी वाले सदाबहार जंगलों में 543 से 1134 मीटर की ऊंचाई पर पनपता है। इसके फूल और फलने का समय अक्टूबर और जनवरी के बीच होता है।