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मानसून के दौरान इस रेयर बीमारी के फैलने का खतरा, इन सुझावों को जानने के बाद ही पानी में रखें कदम

यह लेप्टोस्पिरा जीनस के बैक्टीरिया के कारण होता है। यह संक्रमित जानवरों के मूत्र के जरिए फैलता है।

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Priya Singh

Jul 23, 2018

The risk of leptospirosis spread during monsoon

मानसून के दौरान इस रेयर बीमारी के फैलने का खतरा, इन सुझावों को जानने के बाद ही पानी में रखें कदम

मुंबई। इस मानसून के दौरान मुंबई में हो रही मूसलाधार बारिश में चूहों के द्वारा फैलने वाले रोग 'लेप्टोस्पायरोसिस' से चार लोगों की के मरने की खबर आई है। जिसके बाद कीट नियंत्रण विभाग ने चूहों के 17 बिलों में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया है जिससे इस रेयर रोग को फैलने से बचाया जा सके। आपको जानकारी के लिए बता दें कि, लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु रोग है, जो मनुष्यों और जानवरों को प्रभावित करता है। यह लेप्टोस्पिरा जीनस के बैक्टीरिया के कारण होता है। यह संक्रमित जानवरों के मूत्र के जरिए फैलता है, जो पानी या मिट्टी में रहते हुए कई सप्ताह से लेकर महीनों तक जीवित रह सकते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "अत्यधिक बारिश और उसके परिणामस्वरूप बाढ़ से चूहों की संख्या में वृद्धि के चलते जीवाणुओं का फैलाव आसान हो जाता है। संक्रमित चूहों के मूत्र में बड़ी मात्रा में लेप्टोस्पायर्स होते हैं, जो बाढ़ के पानी में मिल जाते हैं। जीवाणु त्वचा या (आंखों, नाक या मुंह की झल्ली) के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, खासकर यदि त्वचा में कट लगा हो तो।

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मिली जानकारी के अनुसार दूषित पानी पीने से भी संक्रमण हो सकता है। उपचार के बिना, लेप्टोस्पायरोसिस गुर्दे की क्षति, मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के चारों ओर सूजन), लीवर की विफलता, सांस लेने में परेशानी और यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकता है।" लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षणों की बात करें तो इसमें तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, पीलिया, लाल आंखें, पेट दर्द, दस्त आदि शामिल हैं। किसी व्यक्ति के दूषित स्रोत के संपर्क में आने और बीमार होने के बीच का समय दो दिन से चार सप्ताह तक का हो सकता है। डॉक्टरों की मानें तो इस बीमारी से बचने के लिए गंदे पानी में घूमने से बचें। चोट लगी हो तो उसे ठीक से ढंके। बंद जूते और मोजे पहन कर चलें। मधुमेह से पीड़ित लोगों के मामले में यह सावधानी खास तौर पर महत्वपूर्ण है। अपने पैरों को अच्छी तरह से साफ करें और उन्हें मुलायम सूती तौलिए से सुखाएं। गीले पैरों में फंगल संक्रमण हो सकता है। पालतू जानवरों को जल्दी से जल्दी टीका लगवाएं, क्योंकि वे संक्रमण के संभावित वाहक हो सकते हैं।