
संस्कारशाला में कविता पाठ के बाद पुरस्कार प्राप्त करते बच्चे। साथ में आयोजक एवं अतिथि।
सनातन संस्कृति को रखें जीवंत
सुभद्रा कृष्ण सेवा संस्थान अयोध्या की संस्थापिका एवं कथावाचिका सुभद्रा कृष्ण ने बच्चों को रामचरितमानस, गीता, रामायण और भागवत पुराण की शिक्षाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्कार केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और जीवनशैली का हिस्सा होने चाहिए। पर्व-त्योहारों की परंपराओं को समझकर और अगली पीढ़ी तक पहुंचाकर ही सनातन संस्कृति को जीवंत रखा जा सकता है।
संस्कारों से जुड़े रहने के लिए किया प्रेरित
उन्होंने बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ मंच पर आकर अपनी प्रस्तुतियां दीं। कविता की आठ पंक्तियां सुनाने वाले बच्चों को विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे और अन्य बच्चों में भी मंच पर प्रस्तुति देने का उत्साह नजर आया।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर बाबा रामदेव बाल सत्संग सुधा के संस्थापक सदस्य बालकृष्ण सराफ, पंडित जेठमल श्रीमाली, राजपुरोहित समाज हुब्बल्ली के अध्यक्ष भूरसिंह राजपुरोहित, वरिष्ठ सदस्य नाथूसिंह राजपुरोहित तथा सनातन सेवा संगठन चैरिटेबल ट्रस्ट के कार्यकारिणी सदस्य बाबूलाल सीरवी ने विचार व्यक्त किए। राजपुरोहित समाज हुब्बल्ली के सह सचिव रमेश कुमार राजपुरोहित ने कथावाचिका सुभद्रा कृष्ण का शॉल एवं माल्यार्पण से सम्मान किया। अयोध्या से पधारीं मीरा शर्मा का भी दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बाबा रामदेव बाल सत्संग सुधा के वरिष्ठ सदस्य राजेश रावल, महावीर वैष्णव, गौरव शर्मा समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Updated on:
30 Aug 2026 06:56 pm
Published on:
30 Aug 2026 06:52 pm
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