
कथा से पूर्व संगीतमय सुन्दरकाण्ड की प्रस्तुति देती कथावाचिका सुभद्रा कृष्ण एवं श्रद्धालु महिलाएं।
हनुमान की भक्ति प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणादायी
कथावाचिका सुभद्रा कृष्ण ने कहा कि हनुमान की भक्ति, विनम्रता और सेवा भावना प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणादायी है। भगवान राम से भेंट होते ही हनुमान ने स्वयं को प्रभु की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें अहंकार का स्थान नहीं होता और भक्त प्रभु के कार्य को अपना कर्तव्य मानकर पूरी निष्ठा से करता है।
राम और सुग्रीव की मित्रता
कथा में बताया गया कि माता सीता की खोज में वन-वन भटकते भगवान राम और लक्ष्मण की भेंट हनुमान से होती है। हनुमान ने भगवान राम और सुग्रीव की मित्रता कराई। इसके बाद भगवान राम ने सुग्रीव को न्याय दिलाने का वचन दिया और सुग्रीव ने माता सीता की खोज में भगवान राम की सहायता करने का संकल्प लिया। वानर सेना को चारों दिशाओं में माता सीता की तलाश के लिए भेजा गया।
विनम्रता बनाए रखना ही वास्तविक महानता
सुभद्रा कृष्ण ने कहा कि जीवन में विपरीत परिस्थितियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, विश्वास और समर्पण के साथ आगे बढऩे पर समाधान अवश्य मिलता है। हनुमान के चरित्र से हमें यह सीख मिलती है कि अपनी शक्ति का उपयोग सेवा और परोपकार के लिए करना चाहिए। व्यक्ति के भीतर सामथ्र्य होने के बावजूद विनम्रता बनाए रखना ही उसकी वास्तविक महानता है।
Updated on:
29 Aug 2026 08:13 pm
Published on:
29 Aug 2026 08:12 pm
