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इस्कॉन नए मंदिर में पहली बार मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, महोत्सव में 40 हजार भक्तों के भाग लेने का दावा

इस्कॉन हुब्बल्ली-धारवाड़ की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन 3 और 4 सितंबर 2026 को श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाएगा। मंदिर परिसर को फूलों और आकर्षक सजावट से सजाया जाएगा। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस्कॉन के नए मंदिर में पहली बार जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।
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जन्माष्टमी महोत्सव के बारे में जानकारी देते इस्कॉन हुब्बल्ली-धारवाड़ के अध्यक्ष राजीव लोचन दास एवं उपाध्यक्ष रघोत्तम दास।

जन्माष्टमी महोत्सव के बारे में जानकारी देते इस्कॉन हुब्बल्ली-धारवाड़ के अध्यक्ष राजीव लोचन दास एवं उपाध्यक्ष रघोत्तम दास।

विभिन्न भक्ति गतिविधियों का होगा आयोजन
महोत्सव के तहत 3 सितंबर को सुबह 4: 30 बजे मंगल आरती से धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक अर्चना और आरती का आयोजन मुख्य मंदिर सभागार में किया जाएगा। श्रद्धालु दिनभर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और विभिन्न भक्ति गतिविधियों में भाग ले सकेंगे। इसी दिन सुबह 10:30 बजे से झूलन सेवा आयोजित होगी। लड्डू गोपाल को विशेष रूप से सजाए गए झूले पर विराजमान किया जाएगा और श्रद्धालुओं को इस सेवा में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

108 प्रकार के भोग की विशेष तैयारी
इस्कॉन हुब्बल्ली-धारवाड़ के अध्यक्ष राजीव लोचन दास एवं उपाध्यक्ष रघोत्तम दास ने पत्रकारों को बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को 108 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। ये प्रसाद भक्तों द्वारा प्रेमपूर्वक तैयार किए जाएंगे। भोग अर्पित किए जाने के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। महोत्सव के दौरान शाम को हुब्बल्ली-धारवाड़ के कलाकारों की ओर से भक्ति संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और नृत्य कार्यक्रम भी होंगे। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण के साथ सांस्कृतिक आनंद प्रदान करना है।

4 सितंबर को विशेष आयोजन
4 सितंबर, शुक्रवार को सुबह से ही विशेष धार्मिक कार्यक्रम होंगे। मंदिर में लगातार अर्चना और आरती के साथ श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में शामिल होने का अवसर मिलेगा। जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष अभिषेक, आरती, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। महोत्सव के क्रम में 5 सितंबर 2026 को व्यास पूजा होगी। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और कृतज्ञता के साथ विशेष पूजा-अर्चना तथा अभिषेक किया जाएगा। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में मंदिर की शुरुआत हुई थी, तब जन्माष्टमी पर करीब दो सौ भक्त पहुंचे थे। इस बार 40 हजार से अधिक भक्तों के दर्शन करने की संभावना है। 1008 फीट का गोपुरम बनाया जा रहा है। नए मंदिर का काम अक्टूबर के अंत तक पूरा होने की संभावना है