5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गोवा के बीचों पर समय से पहले ऑलिव रिडले कछुओं की दस्तक

गोवा के तटीय क्षेत्रों में 2025-26 के ऑलिव रिडले कछुआ नेस्टिंग सीजन की शुरुआत इस बार सामान्य से पहले हो गई है।

2 min read
Google source verification
गलगीबागा में 2025-26 सीजन का पहला नेस्ट, अब तक 780 अंडे दर्ज

गलगीबागा में 2025-26 सीजन का पहला नेस्ट, अब तक 780 अंडे दर्ज

साउथ गोवा के गलगीबागा बीच पर इस सीजन का पहला ऑलिव रिडले कछुआ रिकॉर्ड किया गया, जिसने समुद्र में लौटने से पहले 109 अंडे दिए। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने अंडों को सुरक्षित इनक्यूबेशन के लिए कछुआ पुनर्वास केंद्र में शिफ्ट कर दिया, जहाँ लगभग 60 दिनों में उनके फूटने की संभावना है। पिछले सीजन में गलगीबागा में पहला नेस्ट 2 जनवरी को दर्ज किया गया था, जबकि इस बार यह गतिविधि 30 दिसंबर को ही सामने आ गई। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र और मौसम की अनुकूल परिस्थितियाँ कछुओं के समय से पहले आगमन का प्रमुख कारण हो सकती हैं।
नॉर्थ गोवा के मोरजिम बीच पर भी सामान्य से पहले नेस्टिंग गतिविधि देखी गई है। यहाँ अब तक दो नेस्टिंग घटनाओं की पुष्टि वन विभाग द्वारा की जा चुकी है। इसी तरह साउथ गोवा के अगोंडा बीच पर इस सीजन में अब तक 441 अंडे दर्ज किए गए हैं। पूरे गोवा में अब तक कुल 780 ऑलिव रिडले कछुओं के अंडे रिकॉर्ड किए जा चुके हैं।

बढ़ती मानवीय मौजूदगी चिंता का विषय
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा तो गलगीबागा, अगोंडा और अन्य तय नेस्टिंग स्थलों पर कछुओं की गतिविधि और बढ़ सकती है। हालांकि, बढ़ती मानवीय गतिविधियाँ—विशेषकर पर्यटकों की भीड़, तेज रोशनी और शोर—कछुओं की नेस्टिंग के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।
अधिकारियों ने बताया कि नेस्टिंग स्थलों पर रात के समय नियमित गश्त बढ़ा दी गई है। अंडों को सुरक्षित रखने के लिए कई मामलों में उन्हें समुद्र तट से हटाकर पुनर्वास केंद्रों में इनक्यूबेशन के लिए रखा जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों, बीच शैक संचालकों और पर्यटकों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

संवेदनशील प्रजाति
वन विभाग ने अपील की है कि कछुओं के नेस्टिंग के दौरान फ्लैश फोटोग्राफी, तेज संगीत और वाहनों का उपयोग न किया जाए। साथ ही यदि किसी भी बीच पर कछुआ अंडे देने आता दिखाई दे, तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग या नजदीकी अधिकारियों को दी जाए। अधिकारियों का कहना है कि ऑलिव रिडले कछुए अत्यंत संवेदनशील प्रजाति हैं और थोड़ी सी भी बाधा से वे नेस्टिंग प्रक्रिया बीच में छोड़ सकते हैं। ऐसे में जनसहयोग से ही इन दुर्लभ कछुओं और उनके अंडों की रक्षा संभव है। वन विभाग को उम्मीद है कि सामूहिक प्रयासों से यह सीजन कछुआ संरक्षण के लिहाज से सफल साबित होगा।