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37 साल पहले बनाया पाश्र्वनाथ भगवान का मंदिर, मंदिर के आंतरिक हिस्से में कांच की बेहतरीन कारीगरी, महावीर स्वामी के 14 स्वप्न के भावार्थ सहित पेंटिंग

हर साल धूमधाम से मनाते हैं महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव

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पाश्र्वनाथ भगवान का मंदिर

पाश्र्वनाथ भगवान का मंदिर

कर्नाटक के भद्रावती (शिवमोग्गा) में पाश्र्वनाथ भगवान (मूलनायक) मंदिर की प्रतिष्ठा 1987 में हुई। मंदिर परिसर में ही भगवान आदिनाथ, शांतिनाथ, महावीर स्वामी, इच्छापूर्ण पाश्र्वनाथ समेत अन्य प्रतिमाएं विराजित है। मंदिर मकराना के सफेद मारबल से बना है। मंदिर के आंतरिक हिस्से में कांच की बेहतरीन कारीगरी की गई है। मंदिर के ऊपरी हिस्से में महावीर स्वामी के 14 स्वप्न के भावार्थ सहित पेंटिंग बनाई हुई है।

जन्म कल्याणक पर शोभायात्रा
श्री श्वेताम्बर जैन संघ की मेजबानी में कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पर्यूषण पर्व के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम होते हैं। महावीर जन्म कल्याणक उत्साह से मनाते हैं। इस दौरान शोभायात्रा निकाली जाती है। शोभायात्रा मंदिर परिसर से रवाना होकर सीएन रोड, बीएच रोड समेत प्रमुख मार्गों से होते हुए पुन: मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न होती है। शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली जाती है। अन्नदान का आयोजन भी किया जाता है। अस्पताल में मरीजों को फलों का वितरण किया जाता है।

मंदिर का ध्वजा महोत्सव कार्यक्रम
हर साल मंदिर का ध्वजा महोत्सव कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है। मूर्तिपूजक समाज के 65 परिवार निवास कर रहे हैं। इनमें अधिकांश परिवार राजस्थान के जालोर, सिरोही, पाली, बालोतरा, जोधपुर एवं फलोदी जिलों से हैं।

पहली बार नव्वाणु जातरा
सचिव भंवरलाल जैन ने बताया कि इस बार चातुर्मास के अवसर पर यहां पहली बार नव्वाणु जातरा किया गया। पालीताणा की तरह का ही यहां स्वरूप बनाया गया। इसके तहत कई श्रावक-श्राविकाओं ने नव्वाणु जातरा किया। इसमें कई ऐसे श्रावक- श्राविका भी थे जिनकी उम्र 70 पार थी। वे भी तीस सीढिय़ां चढ़े।