
बटुक भैरव जयंती : आज शिवलिंग पर करें ये उपाय, राशि में हमेशा शांत रहेंगे राहु-केतु, खत्म होंगे सब अशुभ प्रभाव
इंदौर. त्योहारों के देश भारत में आज बटुक भैरव जयंती मनाई जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बटुक भैरव जयंती के दिन जो भी शख्स विधि-विधान से पूजा करता है, उसकी राशि में राहु और केतु हमेशा शांत रहते हैं और वह सदैव ही दुश्मनों को पराजित करने में कामयाब होता है।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, दूध चंद्रमा का प्रतीक होता है, बटुक भैरव के दिन कच्चे दूध को शिवलिंग पर अर्पित किया जाए तो सभी ग्रहों के अशुभ प्रभाव समाप्त होते हैं। इस दिन वे सभी लोग, जिनको मनचाही नौकरी नहीं मिल रही, विवाह में बाधा है, प्रमोशन नहीं हो रहा है या आवास से लेकर ऋण के लिए परेशान हो रहे हैं, उनके लिए ये दिन विशेष शुभ योग लेकर आया है। अधिक मास में अगर कोई विशेष पूजन करने से रह गया है तो उनको इस दिन महादेव को दूध अर्पित कर अपनी सभी इच्छाओं को पूरा करवा सकता है।
बटुक भैरव की साधना
बटुक भैरव की साधना करने वाले साधक को कभी धन की कमी नहीं रहती और वह सुखपूर्वक वैभवयुक्त जीवन- यापन करता है। जो साधक बटुक भैरव की निरंतर साधना करता है, उसे भैरव बींब रूप में दर्शन देकर कुछ सिद्धियां प्रदान करते हैं, जिसके माध्यम से साधक लोगों का भला करता है। भगवान भैरव अपने भक्तों के कष्टों को दूर कर बल, बुद्धि, तेज, यश, धन व मुक्ति प्रदान करते हैं। भैरव जयंती पर अष्ट महाभैरव की यात्रा तथा दर्शन पूजन से मनोवांछित फल की प्राप्ति व भय से मुक्ति मिलती है।
शिव मंदिर में पूजा करें
बटुक भैरव जयंती के दिन सुबह गंगा जल डालकर स्नान करें। इसके बाद सफेद वस्त्र धारण करें। भैरव देव को सफेद फूल ,केला, लड्डू, तुलसी पत्ते और पंचामृत चढ़ाएं। इसके बाद बटुक भैरवाय नम: का जप करें। आज के दिन कुत्ते को दूध जरूर पिलाएं।
क्यों मनाई जाती है बटुक भैरव जयंती
हिंदी ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी को बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव ने भैरव के रूप में अवतार लिया था। बटुक भैरव भगवान शिव का ही रूप है। यह भगवान शिव का क्रोधित, भयानक, विकराल और प्रचंड रूप है। बटुक भैरव की पूजा करने से शत्रुओं और विरोधियों का कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं होता है।
ये है पौराणिक कथा
प्राचीन काल की बात है। आपद नाम का एक राक्षस था। आपद का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। तीनों लोकों के देवी-देवता और पृथ्वी पर मनुष्य उसके अत्याचार से परेशान थे। आपद को वरदान था कि कोई देवी-देवता उसे नहीं मार सकते। सिर्फ कोई पांच साल का बच्चा ही उसका वध कर सकता है। अपनी समस्या लेकर तब देवी-देवता शिवजी के पास गए। शिव की कृपा और देवी-देवताओं की शक्ति से पांच साल के बालक के रूप में शिव की उत्पत्ति हुई। बालक का नाम बटुक भैरव रखा गया। इसी बालक ने आपद नाम के राक्षस का वध किया।
Published on:
10 Jun 2019 03:06 pm
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