
Big Revealed pipelines were laid in the drainage system in Indore now pandemic Patrika Investigation: दाएं से: भागीरथपुरा क्षेत्र मैं संजीवनी क्लिनिक वाली गली में घरों से निकलने वाले सीवरेज लाइन के नीचे से गुजर रही नर्मदा पाइपलाइन और बाएं: सीवरेज क्रॉसिंग पॉइंट पर साफ पानी मिलता देख उसके लिए सैंपल। (photo: patrika)
Indore News: 13 करोड़ दिए थे मॉनिटरिंग के लिए, फिर भी ड्रेनेज में डाली पानी की लाइन भा गीरथपुरा क्षेत्र में पानी की लाइन डालने के टेंडर रुके होने की बात जिम्मेदार कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और है। सात साल पहले हुए 287 करोड़ के टेंडर के तहत पानी की लाइन डालने का काम शुरू हुआ था, लेकिन ड्रेनेज की लाइन के पास ही पेयजल लाइन चैंबर्स के अंदर से डाल दी गई। इन्हीं बातों का ध्यान रखने नगर निगम ने 13.77 करोड़ रुपए वर्ष 2017 में खर्च किए थे।
भागीरथपुरा क्षेत्र की 28 के लगभग गलियों में किसी महामारी से इनकार नहीं किया जा सकता। भले ही प्रशासन कोई रिपोर्ट सार्वजनिक करे या न करे, लेकिन लोग इसे समझ चुके हैं, क्योंकि एक सप्ताह में हजारों लोगों का बीमार होना, 500 से अधिक लोगों का अस्पताल में भर्ती होना व 16 लोगों की मौत सामने है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को देखते हुए 5 जिलों से महामारी विशेषज्ञों की टीम मैदान में उतारी है। शुक्रवार को विशेषज्ञों ने नगर निगम अमले के साथ क्षेत्र का ग्राउंड लेवल सर्वे किया। गली नंबर-1 से शुरुआत कर टीम ने पूरे इलाके में यह समझने की कोशिश की कि नर्मदा जल लाइन और सीवरेज लाइन के क्रॉसिंग पाइंट कहां-कहां हैं और संक्रमण कैसे फैला, क्योंकि जब पूरे क्षेत्र के घरों में गंदा पानी पहुंचा व लोग बीमार हुए तो यह एक पाइंट के खराब होने से नहीं हो सकता।
पांच जिलों के महामारी विशेषज्ञ 'रिंग सर्वे' शुरू किया। इसमें प्रभावित क्षेत्र के आसपास 50-50 घरों का सर्वे कर रहे हैं। ऐसे पाइंट खोज रहे हैं जहां अमृत योजना-1 और अमृत योजना-2 की पाइप लाइन व सीवरेज लाइन क्रॉस हो रही है।
महामारी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केवल एक पाइंट पर लीकेज होता तो इतने बड़े इलाके में एक साथ संक्रमण नहीं फैलता। यह नेटवर्क स्तर की समस्या हो सकती है। इसी आशंका के चलते विशेषज्ञों ने 'रिंग सर्वे' मॉडल अपनाया है, जिसमें प्रभावित इलाके के चारों ओर 50-50 घरों का सर्वे कर जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच में सामने आया कि गली नंबर-1 सहित कई स्थानों पर सरकारी बोरिंग उसी लाइन से जुड़ी है, जिससे नर्मदा जल की सप्लाई होती है। नर्मदा जल न मिलने पर उसी पाइप से बोरिंग का पानी सप्लाई किया जाता है। यह व्यवस्था अमृत योजना-1 और अमृत योजना-2 के तहत डाली गई लाइन से जुड़ी है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि यदि बोरिंग या पास का क्षेत्र दूषित हुआ तो वही पानी पूरे नेटवर्क में फैल सकता है। बोरिंग के पानी के सैंपल भी लिए गए हैं।
भागीरथपुरा के निचले इलाके में जब टीम पहुंची तो एक सरकारी बोरिंग के पास सीवरेज क्रॉसिंग खुलवाया गया। एक पाइप से अत्यंत गंदा पानी, जबकि दूसरी तरफ अपेक्षाकृत साफ पानी बहता मिला। दोनों जगह से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं।
महामारी विशेषज्ञों ने प्रभावित गलियों में जाकर मरीजों से सीधी बातचीत की। कई लोगों ने बताया, वे नर्मदा का पानी बिना उबाले पीते थे। अचानक उल्टी-दस्त शुरू हो गए। पूरे मोहल्ले में एक साथ लोग बीमार पड़े। टीम ने हर घर के नल कनेक्शन, सह्रश्वलाई स्रोत और उपयोग के तरीके की जानकारी भी दर्ज की।
-सभी क्रॉसिंग पाइंट की मैपिंग
-लाइन की ऊंचाई और दूरी की जांच
-बोरिंग कनेक्शन की तकनीकी स्थिति सप्लाई नेटवर्क में बैकफ्लो की संभावना
-लैब रिपोर्ट के आधार पर संक्रमण का स्रोत तय करना
नगर निगम अधिकारियों ने टीम को बताया कि क्षेत्र में कई जगह सीवरेज लाइन, नर्मदा लाइन के समानांतर डाली गई है। कई स्थानों पर सीवरेज लाइन ऊपर से क्रॉस कर रही है। कुछ पाइंट ऐसे हैं जहां पुरानी लाइनें बेहद नजदीक हैं। इन सभी क्रॉसिंग पाइंट्स की अब अलग-अलग रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
यादव गली में एक मकान में 8-10 किराएदार मिले। एक बच्चे की तबीयत खराब होने पर जांच की गई। परिजनों ने बताया कि बच्चे ने क्षेत्र में सप्लाई होने वाला नर्मदा जल पिया था, उसके बाद तबीयत बिगड़ी। इलाज के बाद अब ठीक है। अब हम बोरिंग का पानी भी उबालकर दे रहे हैं।
Published on:
03 Jan 2026 11:17 am
बड़ी खबरें
View Allइंदौर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
