
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं शोभा ओझा।
महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने भी अपनी पार्टी से किनारा कर लिया। उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को पत्र लिखकर लोकसभा चुनाव (lok sabha election) की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। इसके पीछे पारिवारिक कारण बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से शोभा की पटरी नहीं बैठ पा रही थी और स्थानीय स्तर पर शोभा का विरोध हो रहा था। संभवतः इसी कारण से शोभा ओझा ने ऐसा फैसला किया है।
शोभा ओझा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को पत्र लिखकर पार्टी का काम करने में अक्षमता जाहिर की है। हालांकि अंदर ही अंदर माना जा रहा था कि शोभा की पटरी जीतू पटवारी से नहीं बैठ पा रही थी। इसके अलावा पार्टी के कार्यकर्ताओं की टिप्पणी से आहत होकर भी शोभा ओझा ने यह फैसला लिया है। शोभा के ही साथ पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल भी इंदौर लोकसभा सीट के लिए प्रभारी बनाए गए थे। उन्होंने भी उत्तर प्रदेश में अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए समय न देने की बात कही थी।
ओझा का यह मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शोभा के वायरल मैसेज में कहा गया है कि दिल्ली में रहने वाली उनकी बहन की तबीयत बेहद खराब है। वे उनकी मदद में लगी हैं। ऐसे में वे कुछ सप्ताह तक पार्टी के कामों में वक्त नहीं दे सकती हैं।
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यह दबी जुबां में कहा जा रहा है कि इंदौर के कार्यकर्ताओं और पूर्व पदाधिकारियों की टिप्पणी को आहत होकर शोभा ने ऐसा फैसला लिया है। दरअसल, शोभा को प्रभारी बनाए जाने के बाद से कांग्रेस के पदाधिकारी रहे अनूप शुक्ला ने सोशल मीडिया पर आलोचना की थी। उन्होंने वाट्सअप ग्रुपों में यहां तक लिख दिया था कि पार्टी ने उन्हें विधायक से लेकर महापौर तक का चुनाव लड़ाया, लेकिन एक भी चुनाव नहीं जीत सकीं। चुनाव के बाद वे कार्यकर्ताओं के बीच भी नहीं रहती हैं। दिल्ली में प्रभाव के दम पर पद लेकर आ जाती हैं।
सत्यनारायण पटेल और शोभा ओझा के अलग होने के बाद अब पूरा भार आगर मालवा के पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े के कंधों पर है। उन्हें हाल ही में इंदौर लोकसभा सीट का सह प्रभारी बनाया गया है। गौरतलब है कि इंदौर लोकसभा के कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय बम के पुराने संबंध विपिन वानखेड़े से हैं। बताया जा रहा है कि बड़े नेताओं के रुख को भांपकर अक्षय बम के कहने पर ही वानखेड़े को इंदौर की जिम्मेदारी दी गई है।
इंदौर लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। 1989 से यहां भाजपा का कब्जा है। पिछले चुनाव में 2019 में कांग्रेस के पंकज संघवी भाजपा के शंकर लालवानी से रिकार्ड 5.47 लाख वोटों से हार गए थे, अब भाजपा 8 लाख से अधिक वोटों से जीतने का टारगेट लेकर चल रही है। पिछले चुनाव में हारे पंकज संघवी भी अब भाजपा के साथ आ गए हैं। इसके अलावा कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने का सिलसिला लगातार चल रहा है।
Updated on:
05 Apr 2024 02:09 pm
Published on:
05 Apr 2024 01:39 pm
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