
MP News :इंदौर शहर के 85 वार्डों में से करीब 37 महिला पार्षद हैं। इनमें से 80 प्रतिशत महिला पार्षदों का काम उनके पति ही संभाल रहे हैं। आलम यह है कि वार्ड की जनता से लेकर नगर निगम तक के पास महिला पार्षद के नंबर ही नहीं है। लोगों को वार्ड से जुड़ी समस्या के लिए पार्षद पति से ही संपर्क करना पड़ता है।
इस मामले को लेकर पत्रिका टीम ने करीब 10 महिला पार्षदों से फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर में पार्षद पतियों ने ही बात की। इनमें से ज्यादातर पार्षद पतियों ने कहा पूरा वार्ड तो मैं ही देखता हूं, बताओ या काम है? वहीं कई महिला पार्षदों ने पति का नंबर देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। एक पार्षद ने बात की, लेकिन पीछे से पति के इशारों पर सवालों के जवाब दे रही थीं। ऐसे में कई महिला पार्षद केवल नाम की हैं, कार्य उनके पति ही देखते हैं।
वार्ड से लेकर नगर निगम तक पार्षद पति के नंबर ही चलते हैं, महिला पार्षदों के नंबर ही अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। निगम कंट्रोल रुम से महिला पार्षदों के नंबर मांगे तो उन्होंने भी पार्षद पति के नंबर ही दिए। इससे यह साबित होता है कि पार्षदों ने अपने स्वयं के नंबर ही जारी नहीं किए हैं। 80 प्रतिशत महिला पार्षदों का काम उनके पति ही काम संभाल रहे हैं और महिलाएं पार्षद होने के बाद भी वार्ड में सक्रिय नहीं हैं।
रिपोर्टर- पार्षद से बात करनी है।
पार्षद पति- करवा देता हूं।
रिपोर्टर- गर्मी के मौसम में वार्ड में पानी की क्या व्यवस्था है?
पार्षद- पानी की कोई खास समस्या नहीं है। (फोन पर पीछे से पार्षद पति जानकारी दे रहे थे।)
रिपोर्टर- पार्षद से बात करना है।
पार्षद पति- मैं आपको नंबर देता हूं, आप बात कर लीजिए। (रिपोर्टर ने महिला पार्षद से फोन पर बात की)
रिपोर्टर- वार्ड में गर्मी में पानी की क्या व्यवस्था है।
पार्षद- वार्ड में नर्मदा लाइन डली होने से पानी की खास दिक्कत नहीं है, फिर भी जरुरत होने पर टैंकर चलाया जाता है।
रिपोर्टर- पार्षद से बात हो सकती है।
पार्षद पति- उनसे बात नहीं हो सकती, बताओं क्या काम है।
रिपोर्टर- वार्ड के बारे में बात करनी है।
पार्षद पति- मैं ही बता दूंगा, पूछो।
रिपोर्टर- पार्षद से बात करनी है।
पार्षद पति- बोलो ना क्या हुआ?
रिपोर्टर- विकास कार्यों को लेकर बात करनी है।
पार्षद पति- सब ठीक है, वैसे पूरा वार्ड मैं ही देखता हूं।
रिपोर्टर- पार्षद से बात करना है।
पार्षद पति- बताओं, क्या बात करनी है।
रिपोर्टर- खबर के संबंध में बात करनी है।
पार्षद पति- मैं ही वर्जन दे दूंगा, समस्या बताओ आप।
रिपोर्टर- पार्षद से बात करनी है।
पार्षद पति- बताओ, क्या बात करनी है।
रिपोर्टर- वार्ड में पानी का समस्या को लेकर बात करनी है।
पार्षद पति- मैं ही बता दूंगा।
रिपोर्टर- पार्षद से बात करनी है।
पार्षद पति- वो अभी यहां नहीं है, क्या बात करनी है।
रिपोर्टर- पानी की समस्या को लेकर जानकारी चाहिए।
पार्षद पति- अच्छा, मैं मैन काम देखता हूं और वो भी काम देखते हैं।
रिपोर्टर- वार्ड की समस्या को लेकर बात करनी है।
पार्षद- मैं आपको पति के नंबर देती हूं, उनसे बात कर लेना।
रिपोर्टर- पार्षद से बात करनी है।
पार्षद पति- उनसे तो नहीं हो पाएगी।
रिपोर्टर- क्यों?
पार्षद पति- मुझे बताओं, मैं ही संभाल लेता हूं काम।
हमारे यहां बड़ी संख्या में महिलाएं पार्षद बनी हैं। महिलाओं को आगे आना होगा, काम सीखना पड़ेगा, अपने और समाज के हक के लिए बोलना पड़ेगा, इस तरह महिलाओं को अपने पतियों पर निर्भर नहीं होना चाहिए। सीनियर्स को महिलाओं को काम करने की ट्रेनिंग देनी चाहिए। मैं स्वयं इसके लिए प्रयास करूंगी।- डॉ. उमाशशि शर्मा, पूर्व महापौर
Published on:
23 Mar 2025 03:57 pm
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