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30 साल पहले नारियल में प्रकट हुए थे ‘एकाक्षी श्रीफल गणेश’, दर्शन मात्र से बनते है काम

Ekakshi Shriphal Ganesh: मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में अनोखा मंदिर है। यहां गणपति बप्पा एकाक्षी श्रीफल के रूप में दर्शन देते हैं, यहां दुनियाभर से भक्त माथा टेकने आते हैं....

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Ekakshi Shriphal Ganesh

Ekakshi Shriphal Ganesh

Ekakshi Shriphal Ganesh: हिंदू धर्म के पूजा-पाठ या शुभ-मांगलिक कार्यों में नारियल का इस्तेमाल जरूर किया जाता है। पूजा-पाठ और शुभ-मांगलिक कार्यों में नारियल चढ़ाने का महत्व है। यही नहीं नए बिजनेस, दुकान का शुभारंभ हो, नया वाहन, गृह प्रवेश, तीज-त्योहार, शादी-विवाह हो या फिर साप्ताहिक व्रत सभी मौके पर नारियल का महत्व होता है।

वहीं कीचन में भी नारियल का इस्तेमाल होता है, जो खाने के स्वाद को बढ़ा देता है लेकिन मध्यप्रदेश के शहर इंदौर में नारियल स्थापित किया गया है, जिसे नारियल गणेश कहा जा रहा है। इस नारियल को अमेरिका स्थित ट्रांसोसियन वर्ल्ड रिकॉर्ड्स नाम की रिकॉर्ड संस्था से मान्यता मिली है।

एकाक्षी श्रीफल के रूप में दर्शन देते हैं बप्पा

दरअसल, खूबसूरत और स्वच्छ इंदौर के जूनी इंदौर शनि मंदिर मेन रोड पर चालीस बरस पहले गणपति बप्पा का एक अद्भुत, अनोखा और प्राचीन मंदिर स्थापित किया गया है, जहां गणपति बप्पा एकाक्षी श्रीफल के रूप में दर्शन देते हैं और इनक नाम श्रीफल सिद्धि विनायक गणेश है। इन चालीस साल में मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं तो सामने आई ही हैं, इसके साथ ही भक्त और भगवान का रिश्ता भी कायम किया है।

क्या है 'एकाक्षी श्रीफल गणेश' की कहानी

मंदिर की स्थापना के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है। पंडित मुरलीधर व्यास को पूजा करते समय नारियल या 'श्रीफल' मिला। जब वह नारियल का बाहरी भाग हटा रहे थे, तो उन्होंने देखा कि, उसके अंदर एक बीज जैसी आकृति है। बाद में गणेश चतुर्थी के अवसर पर पंडित व्यास ने देखा कि, नारियल के बीज के अंदर एक तने जैसी संरचना बन गई है। इसके अलावा, नारियल ने लगभग चार दशकों तक बिना सूखे अपना पानी बरकरार रखा, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।

नारियल ने 21 साल में लिया गणेशजी का आकार

नारियल वाले गणेशजी का पूर्ण आकार 21 वर्षों में निर्मित हुआ है। इसने एक-एक दिन विकास करते हुए एकदंत, मस्तक, मुकुट, नेत्र, कान, गर्दन, मुंड, मुंह ने आकार लिया, तब तक इस नारियल में जल भरा रहा, जबकि साधारण नारियल सूखकर गोला हो जाता है। अधिकतम 6 से 12 माह में नारियल का पानी सड़ जाता है। लेकिन यह तो स्वयं भू गणेश हैं, भगवान ने भक्त से सीधे रिश्ता बनाने के लिए यह अवतार लिया होगा, तभी तो मंदिर में श्रध्दालुओं की हर तरह की मनोकामनाए पुरी होती है।

एकाक्षी श्रीफल का महत्व

एकाक्षी श्रीफल, एक मुखी रुद्राक्ष और दाहिना शंख शास्त्रों में प्रमाणित है कि इन तीनों वस्तुओं में 24 घंटे महालक्ष्मी का निवास होता है और इनके दर्शन मात्र से ही मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। इस एकाक्षीय श्रीफल से गणेशजी ने २१ वर्ष में गजमुख का पूर्ण आकार ग्रहण किया।

विदेशी भक्तों की भी जुड़ी है आस्था

मंदिर के पंडित जी से मिली जानकारी के अनुसार अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, नीदरलैण्ड, दुबई सहित कई भक्तों ने श्रीफल वाले गणेश जी का आशीर्वाद लिया हैं. मंदिर में पानी वाला नारियल, सुपारी, डंठल वाला पान, 16 रुपए राशि भेंट के रूप में देकर अर्जी लगाने वाले की गणेशजी हर मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।

नौकरी के लिए लगाई जाती है अर्जी

चमत्कारी गणेशजी के धाम में एम.बी.ए., डॉक्टर, इंजीनियर, काम्पीटेटिव परीक्षा देने वाले लोग गणपति जी के सामने माथा टेकने तथा सफलता की आस में आते है। बेरोजगार यहाँ बायोडाटा लिखित परीक्षा, इन्टरव्यू के पहले अर्जी लगाने आते है।