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MP News- बड़ी खबर: कर्मचारियों, अधिकारियों के वेतन-भत्तों पर खर्च करेंगे 13 प्रतिशत राशि

Indore- बिजली कंपनी का 25466 करोड़ रुपए का बजट पारित

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वर्ष 2026-27 के 25 हजार 466 करोड़ के कुल बजट में राजस्व बजट 23 हजार 898 करोड़ और 1568 करोड़ कैपेक्स कार्यों के लिए

Electricity Company's Budget of ₹25,466 Crore Passed

Indore- इंदौर में मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग सोमवार को हुई। इसमें प्रदेश के ऊर्जा सचिव और कंपनी के पदेन चेयरमैन विशेष गढ़पाले भोपाल से व अन्य सदस्य वर्चुअल भी शामिल हुए। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के आगामी वित्तीय वर्ष 2026- 27 के लिए 25 हजार 466 करोड़ का वार्षिक बजट रखा गया। ऊर्जा सचिव व अन्य सदस्यों ने बजट को अनुमोदित किया। बड़ी बात यह है कि बजट में कर्मचारियों, अधिकारियों के वेतन-भत्तों का खास ध्यान रखा गया है। इसपर वित्तीय वर्ष 2026-27 में खासी राशि खर्च की जाएगी।

मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का नए वित्तीय वर्ष का बजट पिछले बजट से करीब 11 प्रतिशत अधिक हैं। गढ़पाले ने नए कार्यों, ग्रिडों के निर्माण व परियोजना का काम समय पर करने का कहा। कर्मचारी कल्याण से संबंधित भी निर्णय लिए गए।

वर्ष 2026-27 के 25 हजार 466 करोड़ के कुल बजट में राजस्व बजट 23 हजार 898 करोड़ और 1568 करोड़ कैपेक्स कार्यों के लिए

इस बजट में वर्ष 2026-27 के 25 हजार 466 करोड़ के कुल बजट में राजस्व बजट 23 हजार 898 करोड़ और 1568 करोड़ कैपेक्स कार्यों के लिए हैं। बजट में से करीब 92 प्रतिशत राशि बिजली खरीदी, पारेषण पर व्यय होगी। कर्मचारियों के वेतन, भत्तों इत्यादि पर करीब 13 प्रतिशत राशि खर्च होगी।

प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह ने बिजली कंपनी की प्राथमिकताएं बताईं

कंपनी के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह ने कंपनी की प्राथमिकताओं को लेकर अपने विचार रखे। बैठक में ऊर्जा विभाग के ओएसडी विजय गौर, वित्त विभाग के उपसचिव आरआर मीणा, डॉ. अरुणा तिवारी, मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।

मार्च एंडिंग के कारण विभागों के ढेरों बिल पास होने के लिए आ रहे

इस बीच प्रदेशभर में ट्रेजरी के अधिकारी, कर्मचारी खासे व्यस्त हो गए हैं। मार्च एंडिंग के कारण विभागों के ढेरों बिल पास होने के लिए आ रहे हैं। ऑफिस खर्च के छोटे-छोटे बिल का ढेर लग गया है। बिल की प्रक्रिया अब ऑनलाइन होने के कारण भौतिक रूप से बिल नहीं आते हैं। कंप्यूटर पर बिल स्टेटस देखने के बाद उसे पास किया जाता है।

नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायतों व विश्वविद्यालय में भी बिल पास करने की प्रक्रिया में तेजी

नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायतों व विश्वविद्यालय जैसी स्वायत्त संस्थाओं में भी बिल पास करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही हैं। इनका खुद का अकाउंट है जिसके कारण बिल ट्रेजरी को नहीं भेजे जाते हैं।