
कॉलोनाइजर्स रेरा नियमों के साथ खिलवाड़ करते हुए कॉलोनियां बसा रहे
इंदौर में कॉलोनाइजर्स रेरा नियमों के साथ खिलवाड़ करते हुए कॉलोनियां बसा रहे हैं। ऐसी गड़बड़ी खंडवा रोड पर ग्लोबल रेसीडेंसी कॉलोनी में चल रही है। इसका रेरा में रजिस्ट्रेशन सरोवर रेसीडेंसी नाम से हुआ था, लेकिन ग्लोबल रेसीडेंसी के नाम से कॉलोनी बसाई जा रही है।
महू तहसील में आने वाले खंडवा रोड के ग्राम गोकन्या के खसरा नंबर 121/2, 181/2 सहित अन्य खसरों की 10.17 हेक्टेयर पर ये कॉलोनी विकसित कर रहे हैं। इसमें विकास कार्य पूरे नहीं हुए हैं। जबकि, रेरा ने कॉलोनी विकसित करने को पहले 20 मार्च 2020 और फिर एक साल का एक्सटेंशन देते हुए 20 मार्च 2021 तक की तारीख तय की थी।
लगभग तीन साल बाद भी कॉलोनी में पूरी सड़कें नहीं बनी। ड्रेनेज, पेयजल व बिजली लाइन डालने का काम जारी है। बगीचों का विकास नहीं किया। इसके बावजूद प्लॉट बुकिंग की जा रही है, घर बनाने की अनुमति भी हो रही है। इससे कॉलोनी में घर बनना शुरू हो गए हैं। मालूम हो, रेरा नियमों के तहत कॉलोनाइजर बिना कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के विकास की इजाजत नहीं दे सकता।
गांव महू में, रजिस्ट्रेशन देपालपुर तहसील से : रेरा में इस कॉलोनी के प्रमोटर के तौर पर लक्ष्मी लैंड डेवलपर्स के ग्लोबल ग्रुप से जुड़ी कंपनी जी-9 इन्फ्राटेक प्रालि रजिस्टर्ड है। कंपनी ने रेरा में भी खेल कर दिया है। ग्राम गोकन्या महू तहसील में है, लेकिन कंपनी ने इसे देपालपुर तहसील से रजिस्टर्ड कराया है।
कॉलोनी 10 हेक्टेयर से ज्यादा बड़ी है। ऐसे में यहां से निकलने वाले गंदे पानी का निपटान भी किया जाना है। इसके लिए कॉलोनी में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना है, लेकिन ये प्लांट भी नहीं बना है।
हां, दोनों नाम लिख रहे
जी9 इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ विनोद पालावत स्वीकारते हैं कि हां, नाम नहीं बदल पाया है। रेरा में आवेदन दिया है, वहां से इजाजत नहीं मिली है। हम रजिस्ट्री में सरोवर रेसीडेंसी और ग्लोबल रेसीडेंसी दोनों लिख रहे हैं। हमने तय समय में काम शुरू कर दिया था। वैसे भी कॉलोनी में 80 फीसदी काम हो चुका है।
कराएंगे जांच
इधर इंदौर के कलेक्टर आशीष सिंह के अनुसार ग्लोबल उन्नति कॉलोनी में विकास कार्य पूरे नहीं हुए हैं तो जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई करेंगे।
नक्शा मियाद खत्म
कॉलोनी नक्शा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने 30 जनवरी 2013 को स्वीकृत किया था। उस हिसाब से 29 जनवरी 2016 तक विकास कार्य हो जाने थे, वे अधूरे हैं। नियमानुसार 2016 के बाद साल-साल भर के लिए दो बार नक्शे को रिन्यू करवाया जा सकता था, जिसकी मियाद भी 2018 में पूरी हो चुकी। ऐसे में दोबारा नक्शा स्वीकृत कराना जरूरी था।
इस कॉलोनी का जो नक्शा स्वीकृत हुआ था, उसके तहत यहां सबसे पहले कमजोर आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए जी प्लस 2 की बिल्डिंग बनाई जानी थी, यहां ऐसी कोई बिल्डिंग नहीं बनी। ये जमीन खाली पड़ी है। कॉलोनी के ब्रोशर में इस जगह भी प्लॉट बना दिए गए हैं, जबकि यहां जी प्लस 2 की मल्टी में फ्लैट दिए जाने थे।
Published on:
17 Feb 2024 10:25 am
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