
(फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)
MP News: ट्रायल कोर्ट ने यदि कोई समय सीमा तय नहीं की है तो केवल एक साल के लिए पासपोर्ट रिन्यू करने का फैसला अवैध है। यह टिप्पणी हाईकोर्ट जस्टिस प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने एक डॉक्टर की याचिका पर फैसला देते हुए की। साथ ही उनका पासपोर्ट 10 साल के लिए रिन्यू करने का आदेश दिया।
इंदौर की बसंत विहार कॉलोनी निवासी डॉ. संध्या पंचोली ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि पहली बार मई 2007 में उनका पासपोर्ट जारी हुआ था, जिसकी वैधता मई 2017 तक थी। इसी बीच उन पर एक आपराधिक मामला दर्ज हुआ। उन्होंने 2024 में पासपोर्ट रिन्यू करने का आवेदन किया।
जिस ट्रायल कोर्ट में उनका केस चल रहा था, उसने उन्हें पासपोर्ट रिन्यू कराने की अनुमति दे दी, लेकिन केवल एक साल के लिए पासपोर्ट रिन्यू किया गया। इसके खिलाफ उन्होंने कोर्ट में केस दायर कर मांग की थी कि उनका पासपोर्ट 10 साल के लिए रिन्यू किया जाना चाहिए था।
कोर्ट में केंद्र की ओर से तर्क दिया गया कि ट्रायल कोर्ट ने पासपोर्ट जारी करने और विदेश यात्रा के लिए टाइमलाइन तय नहीं की है। ऐसे में एक साल के लिए पासपोर्ट रिन्यू किया जाना सही फैसला है। कोर्ट में कहा गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट से पहले ही तय हो चुका है कि यदि मजिस्ट्रेट ने कोई समयावधि तय नहीं की है तो पासपोर्ट 10 साल के लिए जारी किया जाना चाहिए। सरकार और पासपोर्ट कार्यालय मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद 10 साल के लिए पासपोर्ट जारी करने को बाध्य है।
मप्र हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है, पहले ही इस तरह के मामलों में बॉम्बे हाईकोर्ट विवेचना कर चुका है। डॉक्टर के मामले में भी आपराधिक न्यायालय ने समय सीमा तय नहीं की है।
Updated on:
27 Jul 2025 11:38 am
Published on:
27 Jul 2025 11:38 am
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