17 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कोविड इफेक्ट पर रिसर्च करेंगे आईआईएम स्टूडेंट

प्रदेश के सभी जिलों के 30 हजार ग्रामीणों से बातचीत करेंगे पीजीपी

2 min read
Google source verification

इंदौर. स्टूडेंट्स को समृद्ध, व्यावहारिक और सामाजिक रूप से उन्मुख दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए आइआइएम इंदौर ने 2009 में रूरल इमर्शन प्रोग्राम जिसे अब रूरल इंगेजमेंट प्रोग्राम-आरईपी के नाम से जाना जाता है, शुरू किया था। इस प्रोग्राम का उद्देश्य उभरते युवा प्रबंधकों और उद्यमियों को सरकार द्वरा गांवों में चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का अध्ययन और उनके क्रियान्वयन व प्रभावशीलता का विश्लेषण करना और इसके प्रति संवेदनशील बनाना था।

इसी के तहत इस बार आरईपी-2021 का ओरिएंटेशन प्रोग्राम आइआइएम इंदौर में 25 अक्टूबर को हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्धघाटन आइआइएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने किया। आरईपी कोऑर्डिनेटर और फैकल्टी हा भवानी शंकर भी इस अवसर पर उपस्थित हुए। इस वर्ष प्रतिभागी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी किए गए कोविड दिशा निर्देशों के आधार पर मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना के बाद स्वास्थ्य और स्वच्छता पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करेंगे।

Must See: गुस्साए किसानों ने दिल्ली मुम्बई रेल मार्ग किया ठप

कोशल बढ़ेगा
प्रो. राय ने कहा भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 8 मिलियन से अधिक लोगों के पास स्वच्छ पेयजल, बिजली, शिक्षा या इंटरनेट जैसी प्राथमिक सुविधाओं तक पहुंच नहीं है। आरईपी न केवल जमीनी हकीकत को समझने में मदद करता है बल्कि उनकी सामाजिक चेतना, और प्रबंधकीय और निर्णय लेने के कौशल को भी बढ़ाता है।

Must See: गंदी नाली के पानी से सब्जियां धोते हुए दिखा रहा था दांत, वीडियो वायरल

प्रो. भवानी शंकर ने कहा ग्रामीण परिदृश्य में बदलाव लाना एक कठिन कार्य है, हालांकि प्रतिभागियों का इस एक सप्ताह के दौरान ग्रामीणों के साथ रचनात्मक जुड़ाव होगा। उन्होंने कहा वे महामारी के प्रभाव का पता लगाने और उससे उत्पन्न हुई समस्याओं से कै से निपटें इस पर काम करेंगे।

Must See: आश्रम विवाद: सांसद प्रज्ञा सिंह का भारत भक्ति अखाड़ा बनाएगा अपना सेंसर बोर्ड