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एक ट्रैक पर नहीं दौड़ेगी इंदौर-उज्जैन मेट्रो, तकनीक ही बन रही बाधा, जाने नया प्लान

Indore-Ujjain Metro : तकनीकी अड़चन से बदला प्लान, दोनों कॉरिडोर अलग रखने की तैयारी। एसी-डीसी तकनीक बनी बाधा, एयरपोर्ट बनेगा कॉमन कनेक्शन।

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Indore-Ujjain Metro

Indore-Ujjain Metro (एक ट्रैक पर नहीं दौड़ेगी इंदौर-उज्जैन मेट्रो Photo Source- Patrika)

Metro Project :मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर से धर्मनगरी उज्जैन के बीच चलने वाली मेट्रो लाइन की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं, लेकिन दोनों शहरों की मेट्रो लाइनें सीधे तौर पर आपस में नहीं जुड़ सकेंगी। तकनीकी और संचालन संबंधी कारणों से इंदौर मेट्रो और उज्जैन मेट्रो को एक ही कॉरिडोर पर लाना फिलहाल संभव नहीं माना जा रहा है। ऐसे में मेट्रो अधिकारियों ने नया प्लान तैयार किया है, जिसके तहत उज्जैन जाने वाली मेट्रो को एयरपोर्ट तक कनेक्ट किया जाएगा, जबकि शहर के भीतर आवागमन के लिए अलग मेट्रो लाइन संचालित होगी।

इससे यात्रियों को इंटरचेंज सुविधा तो मिलेगी, लेकिन दोनों मेट्रो सेवाएं स्वतंत्र रूप से संचालित हो सकेंगी। उज्जैन मेट्रो के लिए तैयार किए गए प्रारंभिक प्रस्ताव में दोनों शहरों की मेट्रो को जोड़ने का सुझाव दिया गया था। इस संबंध में विशेषज्ञों और अधिकारियों के बीच हुई चर्चा में ये मुद्दा प्रमुखता से उठा, लेकिन तकनीकी बाधाओं ने इस योजना पर ब्रेक लगा दिया।

अलग-अलग विद्युत प्रणालियां बनी रोड़ा

मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, इंदौर मेट्रो में डीसी (डायरेक्ट करंट) आधारित प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जबकि उज्जैन मेट्रो के लिए एसी (अल्टरनेटिंग करंट) आधारित संचालन का प्रस्ताव है। अलग - अलग विद्युत प्रणालियों के कारण दोनों कॉरिडोर को सीधे तौर पर जोड़ना आसान नहीं है। ऐसे में अब जो नई योजना सामने आई है, उसके तहत उज्जैन से आने वाली मेट्रो को एयरपोर्ट तक लाने पर विचार किया जा रहा है। इससे यात्रियों को एयरपोर्ट की सीधी कनेक्टिविटी मिल सकेगी। वहीं शहर के भीतर चलने वाली मौजूदा मेट्रो लाइन अपने निर्धारित रूट पर ही संचालित होगी।

ये है कारण

अधिकारियों का मानना है कि एयरपोर्ट से शहर के अंदर का हिस्सा अंडरग्राउंड रहेगा, जबकि अन्य कॉरिडोर एलिवेटेड होंगे। ऐसे में दोनों नेटवर्क का अलग - अलग संचालन अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है।

एसी-डीसी का फर्क बना बाधा

मेट्रो परियोजनाओं के जानकार नागेश नामजोशी का कहना है कि मुंबई में पहले एसी और डीसी दोनों प्रणालियों पर ट्रेनें संचालित होती थीं, लेकिन वहां विशेष प्रकार के इंजन लगाए गए थे। मेट्रो के मामले में ऐसी तकनीक लागू करना काफी जटिल और महंगा होगा। इसके लिए ऐसे विशेष मोटर और कन्वर्जन सिस्टम की आवश्यकता पड़ेगी जो एसी और डीसी दोनों पर काम कर सकें। यदि दोनों मेट्रो नेटवर्क को जोडऩे के लिए विशेष तकनीक अपनाई जाती है तो परियोजना की लागत में बड़ा इजाफा हो सकता है। यही वजह है कि फिलहाल अलग-अलग कॉरिडोर के संचालन की दिशा में योजना आगे बढ़ रही है। हालांकि एयरपोर्ट को साझा कने िटविटी बिंदु बनाकर यात्रियों को दोनों शहरों के बीच बेहतर आवागमन सुविधा देने की कोशिश की जा रही है।