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एमपी में शिक्षा विभाग का अजब कारनामा, 15 साल पहले मृत शिक्षक की कर दी पदस्थापना!

MP Education Department : शिक्षा विभाग के पोर्टल पर चौंकाने वाली गड़बड़ी सामने आई। ढीमरखेड़ा के मंगेली प्राथमिक स्कूल का मामला, जीवित शिक्षक को बताया अतिशेष, मृत शिक्षक का नाम हटाने और जांच की मांग की गई।

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MP Education Department

MP Education Department (15 साल पहले मृत शिक्षक की कर दी पदस्थापना! Photo Source- Patrika)

Katni News :मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। ये मामला सूबे के कटनी जिले के अंतर्गत आने वाले ढीमरखेड़ा विकासखंड के संकुल केंद्र शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उमरियापान से सामने आया है। जहां प्राथमिक शाला मंगेली में करीब 15 साल पहले दिवंगत हो चुके एक शिक्षक का नाम पदस्थापना सूची में दर्ज कर दिया गया है। इस गड़बड़ी के चलते मौजूदा समय में कार्यरत शिक्षक को अतिशेष (सरप्लस) की सूची में शामिल कर दिया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, प्राथमिक शाला मंगेली की स्थापना साल 2011 में हुई थी। मौजूदा समय में विद्यालय में 28 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और दो शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। दिसंबर 2025 में पदस्थ शिक्षक बाला प्रसाद पटेल के चिकित्सा अवकाश पर जाने के बाद विद्यालय एक शिक्षकीय हो गया था, जिसके चलते शॉर्ट टर्म अतिथि शिक्षक का पद भी स्वीकृत किया गया है।

जिम्मेदारों ने अबतक नहीं लिया संज्ञान

इसी बीच अप्रैल 2026 में शिक्षा विभाग के एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर विद्यालय में करीब 15 साल पहले दिवंगत हो चुके शिक्षक महिपाल सिंह ठाकुर का नाम पदस्थ शिक्षक के रूप में दिखाई देने लगा है। इस गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही विद्यालय प्रभारी ने पोर्टल पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई है, लेकिन इस मामले में आरोप ये भी लगाए गए हैं कि, जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक इस मामले पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है।

जीवित शिक्षक को घोषित कर दिया गया अतिशेष

पोर्टल में मृत शिक्षक का नाम दर्ज होने के कारण मौजूदा समय में पदस्थ शिक्षक सूर्यकांत त्रिपाठी का नाम अतिशेष शिक्षकों की सूची में शामिल हो गया है। इससे उनकी पदस्थापना पर भी संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में पीड़ित शिक्षक सूर्यकांत त्रिपाठी की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर मांग की गई है कि, मृत शिक्षक का नाम तत्काल पोर्टल से हटाने का काम किया जाए, साथ ही उनका नाम अतिशेष सूची से विलोपित किया जाए। इसके अलावा ये जांच भी कराई जाए कि, करीब 15 साल पहले दिवंगत हुए शिक्षक का नाम एजुकेशन पोर्टल पर किस आधार पर दर्ज हुआ है, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रुटि दोबारा न हो सके।