
cataracts operation प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)
cataracts operation: एमजीएम मेडिकल कॉलेज के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आइ अस्पताल में मोतियाबिंद के जटिल केस में लेजर तकनीक का उपयोग कर लैंस लगाने की नई तकनीक का उपयोग शुरू हुआ है। इस ग्रीन लेजर तकनीक के माध्यम से जटिल आंखों की सर्जरी में नई सफलता प्राप्त की है। लेंस प्रत्यारोपण पर आधारित यह तकनीक अब उन मरीजों के लिए उम्मीद बनकर सामने आई है, जिनमें पारंपरिक लेंस प्रत्यारोपण संभव नहीं हो पाता। इन सभी 33 ऐसे मरीज जिन्हें मोतियाबिंद के बाद लैंस बैठाना जटिल था उनकी सर्जरी की गई। यह ऑपरेशन सरकारी खर्च पर हुए, जिसमें आयुष्मान योजना के तहत भी मरीज शामिल रहे।
प्रोफेसर डॉ. टीना अग्रवाल ने बताया, शासकीय अस्पताल में इस तरह के लेजर से सर्जरी का सीधा फायदा मरीजों को मिलेगा, जिससे वे निजी अस्पतालों में महंगे इलाज से बचेंगे। आयुष्मान योजना व सरकारी दर पर तय रेट के अनुसार यह ऑपरेशन हो सकेंगे।
इसे टेक्नीक ऑफ प्लैंज फार्मेशन यूजिंग ग्रीन लेजर नाम दिया है, जिसे जर्नर ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी में प्रकाशित किया। जयपुर में हुए अखिल भारतीय नेत्र विज्ञान सोसायटी के वार्षिक सम्मेलन में बेस्ट ओरिजिनल आर्टिकल कैटरैक्ट पुरस्कार से सम्मानित किया है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि मोतियाबिंद के हर केस में लैंस डालना पड़ता है। कई बार लैंस लगाने की स्थिति रुटीन सर्जरी में नहीं हो पाती। इस जटिल स्थिति पर अस्पताल में आए मरीजों की सर्जरी की गई। इस दौरान नैनोमीटर ग्रीन लेजर का उपयोग कर फ्लैंज बनाने की नई विधि अपनाई गई, जिससे लैंस को आंख की सफेद परत (स्क्लेरा) में अधिक सटीकता और मजबूती के साथ स्थापित किया जा सका। इस तकनीक से लैंस डाले, जिसके रिजल्ट बहुत ही अच्छे आए। यह बेसिक तकनीक 2020 में आ चुकी है। इसे आगे बढ़ाकर हमने लेजर तकनीक का उपयोग दिया गया है।
इस तकनीक में लागत कम रखी गई। इसमें लेजर तकनीक से लैंस डाले गए। इसके लिए अलग अलग उम्र के 33 मरीज लिए थे। इनमें 64 वर्ष तक के 17 पुरुष व 16 महिलाएं शामिल रहीं। सर्जरी का खर्च आयुष्मान व सरकारी दर पर ही रही। निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन के 75 हजार रुपए तक खर्च लगता है। यहां 25 हजार रुपए तक के खर्च में हो रही है।
Updated on:
23 Mar 2026 10:46 am
Published on:
23 Mar 2026 10:45 am
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