
MP MLA Court Desision (एमपी-एमएलए कोर्ट से विपिन वानखेड़े समेत 8 बरी Photo Source- Vipin Wankhede FB)
MP News : एमपी-एमएलए कोर्ट ने आगर-मालवा जिले के बड़ौद थाने में दर्ज शासकीय कार्य में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों को धमकाने के छह साल पुराने मामले में पूर्व विधायक और मध्य प्रदेश के इंदौर से कांग्रेस जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े समेत सभी 8 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में पुलिस जांच और अभियोजन की प्रक्रिया पर भी गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा कि, सिर्फ किसी मुद्दे पर पुलिस अधिकारियों से बहस या तर्क-वितर्क करना अपने आप में शासकीय कार्य में बाधा का अपराध नहीं माना जा सकता।
मामला 23 नवंबर 2020 का है। अभियोजन के अनुसार, बड़ौद थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन विधायक विपिन वानखेड़े अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे, पुलिस कार्रवाई का विरोध किया तथा शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और धमकाने जैसी स्थिति उत्पन्न की। पुलिस ने विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता आशीष एस. शर्मा ने अभियोजन के साक्ष्यों और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। न्यायालय ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध नहीं माना और सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी विषय पर जनप्रतिनिधि या आम नागरिक का पुलिस अधिकारियों से वाद-विवाद या तर्क-वितर्क करना मात्र शासकीय कार्य में बाधा का अपराध नहीं है। इसके लिए यह साबित होना आवश्यक है कि आरोपी ने लोक सेवक पर हमला किया हो या उसके विरुद्ध आपराधिक बल का प्रयोग किया हो। न्यायालय ने यह भी कहा कि धक्का-मुक्की के आरोप उपलब्ध साक्ष्यों से प्रमाणित नहीं हो सके।
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत वीडियो फुटेज में ऐसा कोई स्पष्ट दृश्य नहीं मिला, जिससे थाना प्रभारी या अन्य पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की अथवा हाथापाई सिद्ध होती हो, जबकि घटना थाना प्रभारी के कक्ष में होने का दावा किया गया था, उस कक्ष की सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें प्रस्तुत नहीं किया जाता, तो अभियोजन की कहानी संदेह के घेरे में आ जाती है। केवल मौखिक आरोपों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने यह भी पाया कि लोक सेवक के शासकीय कार्य में बाधा संबंधी आरोपों के मामलों में सक्षम प्राधिकारी की लिखित शिकायत आवश्यक होती है, लेकिन इस मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के समग्र विश्लेषण के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। इसके आधार पर पूर्व विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े सहित सभी आठ आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
Updated on:
30 Jul 2026 07:53 am
Published on:
30 Jul 2026 07:52 am
