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देश की उम्मीदों को मिले नए चेहरे

सिविल सेवा परीक्षा : पक्का इरादा, प्रेरणा और कामयाबी के मंत्र

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Kamal Singh

May 11, 2016

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इंदौर.
देश के सबसे प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम परिणाम मंगलवार को घोषित कर दिए गए। इस परीक्षा में कुल 1078 उम्मीदवार सफल घोषित किए गए हैं। इस परीक्षा में एक बार फिर लड़कियों ने परचम फहराया है। दिल्ली की टीना डाबी ने पहले ही प्रयास में टॉप कर ये बता दिया कि लगन के साथ लक्ष्य पर फोकस करें, तो मंजिल कदमों तले होगी। इसी तरह से कश्मीर के अनंतनाग जिले के अतहर आमिर खान ने दूसरी रैंक हासिल कर घाटी की फिजां में युवाओं के लिए नई उम्मीद पैदा की है। वे अपने अनपढ़ दादा को पे्ररणा मानते हैं। इसी तरह से मप्र के दूरदराज के जिलों से भी कई ने सफलता हासिल कर बता दिया कि यह परीक्षा पास करना सिर्फ मेट्रो शहरों के युवाओं के लिए ही नहीं है। सफल उम्मीदवारों का अनुभव उनकी जुबानी...


मां की प्रेरणा से ही मिली सफलता

12वीं में सीबीएसई की टॉपर रहीं टीना डाबी ने पहले प्रयास में यूपीएससी-2015 में भी टॉप किया है। टीवी चैनल से चर्चा में टीना ने कहा , 'मां इंजीनियर हैं। उन्होंने इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस में सफलता हासिल की है। जब मां को मैंने सफलता की जानकारी दी तो वे खुशी के मारे रो दीं। मैंने 20 वर्ष की उम्र में लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। एक साल की तैयारी से सफलता मिली। उन्होंने कहा कि अभी मेरी उम्र 22 साल है। मुझे बहुत कुछ सीखना है। सबकुछ सीखकर देश के लिए काम करूंगी।

सक्सेस मंत्र :
कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं।


'शेल्फ से बाहर आएं नौजवानÓ

स्कंद विवेक धर. कश्मीर के नौजवानों को अपने शेल्फ से निकलने की जरूरत है। देश में बहुत संभावनाएं हैं, आप बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। अवसर को भुनाइए और आप जिस भी क्षेत्र में हैं, उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करिए। यूपीएसएसी की सिविल सर्विसेज परीक्षा में देश में दूसरा स्थान हासिल करने वाले कश्मीर के अतहर आमिर उल शफी ने पत्रिका से विशेष बातचीत में यह बात कही। अतहर ने कहा कि मुझे आईएएस बनने की प्रेरणा शाह फैजल (2009 यूपीएएसी टॉपर) से मिली। मैंने उनसे मुलाकात कर पूछा था कि क्या मुझे भी सिविल सेवा की तैयारी करनी चाहिए।


उन्होंने कहा, बिल्कुल। आईआईटी मंडी से बीटेक करने के दौरान ही मैंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी। पिछले साल मेरी 560वीं रैंक थी। मुझे पूरी उम्मीद थी कि इस साल आईएएस जरूर बन जाऊंगा। अतहर ने कहा कि सिविल सेवा की तैयारी कर रहे सभी नौजवानों से मेरा यभी कहना है कि यदि आपने ठान ही लिया है कि सिविल सेवा में ही जाना है तो फोकस्ड रहो, लेकिन सोशल लाइफ से मत कटो। दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताओ। साथ ही सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जरूरत से ज्यादा समय भी मत खराब करो।


जम्मू और कश्मीर कैडर को पहली पसंद दे चुके अतहर ने कहा कि कश्मीर में हमें समावेशी विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। हमें जन कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक समृद्घि सभी मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। हमें कश्मीर के लोगों खासकर यूथ के साथ एक अंडरस्टैंडिंग बनानी होगी। उन्हें इंगेज करना होगा।


परिवार ने बढ़ाया हौसला : जसमीत सिंह संधु , थर्ड टॉपर

तीसरी टॉपर दिल्ली की जसमीत सिंह संधु बोलीं, यह मेरा चौथा प्रयास था। देश में थर्ड रैंक के लिए मेरा परिवार जिम्मेदार है। जसमीत के पिता इंडियन काउंसलिंग ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) में काम कर रही हैं। वे बोलीं, परिवार ने हर समय मेरा हौसला बढ़ाया। परिवार, दोस्त और टीचर के कारण यह मुकाम हासिल कर पाई हूं। 2014 में इंडियन रेवेन्यू सर्विसेस (कस्टम और सेंट्रल एक्साइज) के लिए चयन हुआ था।


सिंहस्थ में मिली खुशखबरी : नरेंद्र शाह, 86 वीं रैंक, सिंगरौली

दफ्तर से छुट्टी लेकर सिंहस्थ स्नान के लिए गए थे। वहीं से बेटे से मिलने का मन हुआ और दिल्ली पहुंच गए। लौटने की तैयारी कर ही रहे थे कि बेटे के यूपीएससी में चयन की खबर आ गई, तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सिंगरौली के नरेंद्र शाह ने एक साल के भीतर ही अथक मेहनत कर अपनी रैंकिंग में 6 सौ से भी अधिक अंक की छलांग लगाई।दरअसल नरेन्द्र के लिए इतनी बड़ी रैंक मिलना किसी सपने से कम नहीं है। आईआईटी मुंबई के सिविल इंजीनियरशाह ने पिछले साल 694वें स्थान में थे। और उनका चयन इंडियन इंफर्मेशन सर्विस के लिए हुआ था। इस पद पर वे ज्वाइनिंग की तैयारी कर ही रहे थे कि एक बड़ी उपलब्धि उनके खाते में जुड़ गई।


पुलिस को बदलने का सपना: रजत सकलेचा, 141 वीं रैंक, रतलाम

रतलाम के रजत सकलेचा की लंबी मेहनत आखिर रंग लाई। मंगलवार को देर शाम परिणाम की जानकारी मिली, तो माता-पिता को खबर सुनाई। रजत का सपना आईएएस बनना है। पुलिस सेवा में चयन होने से भी वह बहुत खुश है। यदि एमपी केडर मिलता है, तो अपने ही प्रदेश में सेवा करने का मौका मिलेगा। मेरा लक्ष्य है कि पुलिस व आमजन में तालमेल हो।


चमका सागर का सितारा:अर्पित जैन, 144 वीं रैंक , सागर

सागर के अर्पित जैन का पिछले साल भी सिविल सर्विस में चयन हुआ था और उन्होंने 432वीं रैंक मिली थी। वर्तमान में वे फरीदाबाद में इंडियन रिवेन्यू सर्विस (आईआरएस) की ट्रेनिंग ले रहे हैं। पत्रिका से फोन पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि आखिर उनकी मेहनत रंग लाई। पिछली बार कुछ अंकों के कारण उनकी रैंक अच्छी नहीं बनी थी। लेकिन कड़ी मेहनत से इस बार अपना और परिवार को सपना पूरा कर दिखाया।


अर्पित स्कूल से लेकर कॉलेज तक हमेशा अपनी क्लास में टॉप रहे हैं। उनके पिता अरविंद जैन इंजीनियर कॉलेज में टेक्नीकल असिस्टेंट हैं और मां रेखा जैन ग्रहणी हैं। छोटे भाई आर्तिक जैन ने भी इंजीनियरिंग की है। पिता ने बताया कि वे रिजल्ट आने के एक घंटे पहले ही यूपीएससी वेबसाइट खोल बैठ गए थे। आंखें उसी पर टिकी थीं।


भाई से मिली प्रेरणा :ऋचा सक्सेना, 484 वीं रैंक, भोपाल

भोपाल की ऋचा सक्सेना ने बताया कि वह तब से सिविल सर्विसेस में जाने का सपना देख रही है जब वह एमबीबीएस के फाइनल ईयर में थी और भैय्या रोहन सक्सेना ने एमपीपीएस की परीक्षा में टॉप किया था। यह मेरा लिखित परीक्षा का चौथा और इंटरव्यू का तीसरा प्रयास था।

भैय्या इस समय इंदौर में एडिशनल कमिशनर के पद पर कार्यरत है। 4 प्रयास के बाद भी मैनें कभी हार नहीं मानी थी और जब भी पढऩे बैठती थी तो पूरी ईमानदारी के साथ पढ़ाई करती थी। मेरी इस सफलता के पीछे परिवार का रोल सबसे अहम रहा। आसपास के कई लोग ऐसे थे जो मुझे डिमोटीवेट करने का काम करते थे। इस प्रकार के लोगों से बचने के लिए मैनें घर से बाहर निकलना कम कर दिया।


इस दौरान कई ऐसे मौके आए जब मेरे कारण मम्मी भी रिश्तेदारों के यहां समारोह में शिरकत नहीं करती थी। रैंक पीछे होने के कारण एएएस मिलना मुश्किल है पर मुझे जो भी पद मिलेगा उसमें पूरी तरह से अपना कत्वर्य निभाने का प्रयास करुंगी। ऋचा ने यूपीएससी की प्रीपरेशन कर रहे युवाओं को सुझाव देते कहा कि हमेशा पेशेंस के साथ तैयारी करें, असफलता हाथ लगने पर निराश ना हो और अपना निशाना हमेशा अर्जुन की तरह चिडिय़ा की आंख पर रखें।


अखबार पढ़कर मदद मिली: वेदांत कंवर, 303 वीं रैंक, भोपाल

मैं पिछले चार बार ये यह एग्जाम दे रहा हूं। हर बार तीन से चार नंबर से मेरा मैन्स रुक जाता था। इस बार मैंने अपनी पढऩे की टेक्नीक में बदलाव किया। सबसे पहले एग्जाम में सारे आंसर पॉइंट वाइस लिखे। पहले मैं न्यू पेपर पढ़ता था, लेकिन कभी उनके नोट्स नहीं बनाता था। इस बार मैंने रोजना पांच अखबार पढ़े और उनके विधिवत नोट्स बनाए। इससे मुझे फैक्ट्स मेमोराइज करने में आसानी हुई।

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वहीं, प्रसार भारती के डिबेट्स को ध्यान से सुना। इससे मुझे आंसर लिखते वक्त कई डिफरेंट एंगल के पॉइंट्स मिले। वहीं, रुटिन लाइफ स्टाइल में खेलने के लिए वक्त निकाला। रोजाना एक घंटा बॉलिंग करता था। वहीं, आज कल मैं स्वीमिंग कर रहा हूं। रोजाना आठ से दस घंटे की स्टडी करी। मैं मेंटल सपोर्ट के लिए फैमिली का थैंक्स कहना चाहता हूं।


माता-पिता की शादी की सालगिरह पर मिला तोहफा:आशुतोष सिंह, 942 वीं रैंक, सतना

किसी भी दंपती के लिए इससे बड़ी सौगात कोई नहीं हो सकती कि वे शादी की 25 वीं सालगिरह की तैयारी में जुटे हों और बेटा यूपीएससी में चयन का तोहफा थमा दे। सतना के प्रतिभाशाली आशुतोष सिंह ने सच में माता-पिता के लिए ऐसा ही तोहफा दिया है। जिसे अब वे ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। आशुतोष ने यूपीएससी में देश में 942 वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता एनके सिंह स्कूल शिक्षा में सहायक संचालक के पद पर सतना में पदस्थ हैं, जबकि मां शकुंतला सिंह गृहणी हैं। आगामी 6 जून को उनके विवाह की 25वीं वर्षगांठ है और उससे पहले ही बेटे ने उन्हें सरप्राइज कर दिया।


पत्रिका से चर्चा करते हुए दिल्ली से आशुतोष ने बताया, सतना के केंद्रीय विद्यालय से हाईस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद कोटा इंजीनियरिंग की तैयारी करने गए, वहीं से 12वीं की परीक्षा पास की। फिर आईआईटी रुड़की में प्रवेश पाकर बीटेक की पढ़ाई की। यूपीएससी की तैयारी करने दिल्ली पहुंचे, जहां पर पिछले दो साल से तैयारी करते हुए पहली बार परीक्षा में बैठे और गत 28 मार्च को साक्षात्कार के बाद मंगलवार को जारी परिणाम में उनका चयन हो गया।



अच्छी प्लानिंग और लक्ष्य तय कर की तैयारी : श्रीलेखा श्रोत्रिय, 307वीं रैंक, ग्वालियर

यूपीएससी एग्जाम को क्लीयर करने के लिए मल्टीडाइमेंशनल एप्रोच की जरूरत है। इससे पहले मैंने दो बार यूपीएससी एग्जाम दिया लेकिन मल्टीडाइमेंशनल सोच की कमी के कारण क्लियर नहीं कर सकीं। मैंने सेल्फ स्टडी पर फोकस किया। साथ ही वीकली और मंथली शेड्यूल तैयार करके सिलेबस को कंपलीट किया। मैंने खुद को कभी भी घंटों में नहीं बांटा। बस एक टारगेट सेट किया और उसे हासिल करने में जुट गई। राइंटिंग प्रेक्टिस, रिविजन और ऑनलाइन स्टडी पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि एग्जाम फाइट करने के लिए अपनी कमियों को दूर करते हुए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढऩे से ही सफलता मिलती है।


जिसको पाने के बाद सबसे पहले अपनी फैमिली के साथ बांटा। क्योंकि उनके सपोर्ट के बगैर मैं यह कभी नहीं कर पाती। इसलिए रिजल्ट आते ही पैरेंट्स का शुक्रिया अदा किया और मंदिर जाकर भगवान से आर्शीवाद लिया।


माता-पिता से मिली जनसेवा की प्रेरणा: अभिषेक जैन, 404 वीं रैंक, छिन्दवाड़ा

छिंदवाड़ा. यूपीएससी परीक्षा के मंगलवार को घोषित परिणाम में अभिषेक जैन ने 404 वीं रैंक प्राप्त की और जिले का नाम रोशन किया। वे जल संसाधन विभाग छिंदवाड़ा के कार्यपालन यंत्री एमके जैन के सुपुत्र है। अभिषेक के अखिल भारतीय सिविल सेवा में चयनित होते ही उनके घर में बधाइयों का तांता लग गया। उनके पिता एमके जैन ने बताया कि अभिषेक शुरू से ही होनहार छात्र रहा है। वह पहले इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाना चाहता था। फाइनल ईयर में पहुंचने पर बैचमेट और उनकी प्रेरणा से मन बदल गया। इसके बाद कलकत्ता में लगी जॉब को छोड़ा तथा यूपीएससी की तैयारी में जुट गया था।

उसकी सफलता से पूरा परिवार हर्षित है। यह जिले के लिए गौरव की बात है।

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झांसी की एसपी सिटी ने भी लहराया परचम:

उत्तर प्रदेश के झांसी में एसपी सिटी के रूप में तैनात आईपीएस गरिमा सिंह के जीवन का सपना मंगलवार को पूरा हो गया। उनका चयन आईएएस में हो गया। उनकी सामान्य की 91 सीट्स में 55 रैंक है। बेहद जिम्मेदारी भरे पद पर बैठीं गरिमा को ड्यूटी से जो वक्त मिलता था, उसमें ही वे तैयारी करती थीं। प्रतिबद्धता इतनी कि रिजल्ट आने के बाद भी ड्यूटी पर तैनात रहीं। गरिमा सिंह ने पत्रिका से अपने बारे में कई चीजें साझा की...आईपीएस से आईएएस बनीं गरिमा को स्केचिंग करना बहुत अच्छा लगता है। किसी का भी स्केच फटाफट बना देती हैं। जब अनुकूल और शांत माहौल मिलता है तो उनका मन कविता लिखने को भी करता है। उन्होंने अनेक कविताएं भी लिखी हैं। गरिमा के पति नोयडा में इंजीनियर हैं।


गलती बताने वाले दोस्तों ने मांजकर जीत दिलाई:नमन उपाध्याय, 106 वीं रैंक, हरदा

मुझे सतत अध्ययन के बदौलत तो सफलता मिली, गल्तियां बताने वाले दोस्तों का भी बेहतर सहयोग रहा। इससे सुधार के अवसर मिलते थे। यह कहना है परीक्षा में 106 वीं रैंक हासिल करने वाले नमन उपाध्याय का। सेवानिवृत्त शिक्षक बृजमोहन उपाध्याय (लल्लू सर) के पोते नमन के मुताबिक यह उनका पांचवा प्रयास था। एमपीपीएससी 2010-11 में भी उनका चयन हो चुका है, लेकिन आईएएस बनने के लक्ष्य के चलते उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। नियमित 8 घंटे व परीक्षा के दो महीने पहले से 16 घंटे तक अध्ययन करने वाले इस युवा ने अपनी सफलता का श्रेय परिजनों, शिक्षकों और दोस्तों को दिया। वाणिज्य कर विभाग के पूर्व डायरेक्टर नर्मदाप्रसाद उपाध्याय के बेटे नमन ने बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम को जरूरी बताया।


दूसरी बार में चमका आदित्य:आदित्य, 330 वीं रैंक, जबलपुर

यूपीएससी में चयनित होना हर किसी का सपना होता है। इस सपने को पूरा करने के लिए छात्र जी तोड़ मेहनत करते हैं। कड़ी मेहनत और गहन अध्ययन के बाद ही वह मुकाम आता है जब रिजल्ट आने पर पता चलता है कि चयन हो गया है। एकाग्रता, भरपूर ज्ञान और सटीक जवाबों जरिए ही शहर के आदित्य का यूपीएससी में चयन हो पाया है। दूसरी बार के प्रयास में सफल होने के साथ ही आदित्य का सपना पूरा हुआ। इससे परिवार के लोगों में भी खुशी की लहर है।


आदित्य ने यूपीएससी के रिजल्ट में 330वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने इतिहास विषय से स्टडी की थी। आदित्य ने बताया कि वे 2014 में आईटी ब्रांच से इंजीनियरिंग कर चुके हैं। ज्ञान गंगा कॉलेज से इंजीनियरिंग के बाद दिल्ली में जॉब की। हालांकि कुछ महीने में ही जॉब छोड़ दी, क्योंकि उनका मकसद आईएएस अफसर बनने का था। इस दौरान उन्होंने अपने मेंटर्स का गाइडेंस और सेल्फ स्टडी के बूते सफलता पा ली।


आदित्य ने इससे पहले भी यूपीएससी की परीक्षा दी थी, जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास नहीं खोया और अगले अटैम्प्ट की तैयारी में जुट गए। दूसरे अटैम्प्ट में उन्हें सक्सेस मिल गई। आदित्य ने बताया कि जॉब लगने के बाद भी उन्होंने एग्जाम पर फोकस बनाए रखा। दिन-रात गहन अध्ययन करने के बाद ही उन्हें सफलता की सीढ़ी चढऩे का मौका मिल पाया है। आदित्य का कहना है कि उनकी रैंक ठीक है। एेसे में पोस्ट भी बेहतर मिलेगी।



जुनून था तो मिली मंजिल..अंकित खंडेलवाल, 192 वीं रैंक, ग्वालियर

जब मैं इंजीनियरिंग कर रहा था। तो उसी क्षेत्र में कॅरियर के बारे में सोचता था। लेकिन आखिरी वर्षों में आते-आते एडमिस्ट्रेशन सर्विसेज के प्रति रुझान बढ़ता गया। जब ग्वालियर में कलेक्टर रहे पी नरहरि की वर्किंग स्टाइल देखी। तो मेरा रुझान जुनून में बदल गया। जिसको सफल बनाने के लिए मैंने जी तोड़ मेहनत की। जीएस की पढ़ाई सेल्फ की, लेकिन सब्जेक्ट के लिए कॉचिंग ली और बहुत सी टेस्ट सीरीज भी दीं। और आखिरकार मैं सफल हो पाया। जो इतना आसान नहीं था। इससे पहले मैंने तीन अटैम्प्ट दिए थे। जिनमें दो में इंटरव्यू तक पहुंचा था। लेकिन चौथी बार मुझे मेरी मंजिल मिल गई। मैं खुशनसीब था मेरे पैरेंट्स ने मेरा साथ दिया। मेरी असफलताओं में मुझे हौंसला बढ़ाते रहे। अब बस समाज के लिए काम करना है। हालांकि मैं रैंक से बहुत खुश नहीं हूं। इसलिए एक अटैम्प्ट और ट्राय करूंगा।



पिछली नाकामी ने सिखाया:उत्कर्ष मिश्रा, 553 वीं रैंक, ग्वालियर

कहते हैं परिश्रम करने से ही फल मिलता है। लगातार मेहनत, धैर्य और लक्ष्य के प्रति सर्मपण के कारण मुझे यह मुकाम हासिल हुआ है। इससे पहले तीन बार में यूपीएससी के लिए आवेदन किया। पिछले साल में इंटरव्यू तक भी पहुंचा लेकिन मेन्स में माक्र्स कम होने से वंचित रह गया। इस साल मैंने अपनी कमियों को दूर करते हुए 553वीं रैंक प्राप्त की। इससे पहले मैं एक्सरसाइज इंस्पेक्टर, सेबी और कई बैंकों के लिए चयनित हो चुके हूं।


इसके अलावा कुछ समय पहले तक दूरदर्शन में ट्रांसमिशन एक्जीक्यूटिव के पद पर भी कार्यरत था। लेकिन नौकरी छोड़कर दिसंबर में पूरी तरह से यूपीएससी एग्जाम में जुट गया। और अब अपनी मंजिल मैंने पा ली है। जिसको पाने के बाद पैरेंट्स के साथ सेलिब्रेशन किया। पूरे परिवार के साथ भगवान को भी शुक्रिया।


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