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पहलगाम आतंकी हमले का दर्द एक साल बाद भी जिंदा, आज भी दहशत में परिवार

Pahalgam Terror Attack : 22 अप्रैल 2025... पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा होने जा रहा है। एक साल होने को है और वो बर्बर आतंकी हमला भारतीय इतिहास के उन काले पन्नों में दर्ज हो गया, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। सोचना होगा कि उन पीड़ितों का क्या हुआ होगा? पत्रिका ने जब ली मध्यप्रदेश के इंदौर निवासी एक पीड़ित परिवार की सुध तो एक साल बाद भी सहमा हुआ मिला परिवार... उस दर्द से अब तक उबर ही नहीं पाया...

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Pahalgam Terror Attack pain Alive after a year

Pahalgam Terror Attack pain Alive after a year (photo:patrika creative)

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रेल 2025 को हुए आतंकी हमले के पीड़ित इंदौर के वीणानगर निवासी सुशील नथानियल का परिवार एक साल बाद भी हादसे (Pahalgam Terror Attack) से उबर नहीं पाया है। घटना में मारे गए सुशील की पत्नी जेनिफर आतंकी हमले को याद कर आज भी सिहर जाती हैं। आसपास पटाखे भी फूटते हैं, तो दहशत में आ जाती हैं।

पत्रिका ने ली पीड़ित परिवार की सुध

पत्रिका ने पीड़ित परिवार के घर जाकर उनकी सुध ली। एलआइसी कर्मचारी सुशील आलीराजपुर में पदस्थ थे। वह अपनी पत्नी जेनिफर बेटे ऑस्टिन और बेटी आकांक्षा के साथ 18 अप्रेल को कश्मीर घूमने गए थे। जेनिफर कहती हैं कि कश्मीर जाने से पहले सुशील ने सोचा था कि वीणा नगर में मकान बनने के बाद पोस्टिंग इंदौर में होगी। परिवार के साथ खुशी से जीवन व्यतीत करेंगे। सुशील का यह सपना पूरा नहीं हो सका।

बेटे का छलका दर्द, नहीं मिली अनुकंपा नियुक्ति

आकांक्षा निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं, जबकि ऑस्टिन स्पोर्ट्स क्लब में कोच है। परिवार ने बताया कि बेटे को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्हें दुख है कि तमाम जनप्रतिनिधियों ने आकर साथ देने का वादा किया था, लेकिन किसी ने सहयोग नहीं किया। हमले (Pahalgam Terror Attack) में बेटी के पैर में फ्रैक्चर हो गया था। छह महीने तक बेड पर रही, पैर के दो ऑपरेशन हुए।

कभी भूल नहीं सकते, सेना पर पूरा भरोसा

बेटी आकांक्षा ने बताया कि हमले (Pahalgam Terror Attack) के समय पापा उनसे कुछ दूरी पर थे, हम उनके पास पहुंचे तो मां पापा को देखकर बेसुध होकर गिर गई, मेरे पैर में फ्रैक्चर हो गया। मैं छह महीने बेड पर रही। हम कभी भी उस हमले को भुला नहीं सकते, लगता है कि कल की ही बात है। हमें हमारी सेना पर पूरा भरोसा है। लेकिन यह बात जरूर मन में रहती है कि उस इलाके में पूरी निगरानी होती तो, यह हमला टल सकता था।

बरसी से एक दिन पहले भारतीय सेना ने शेयर की पोस्ट

यहां पढ़ें पूरी पोस्ट

भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा है कि, 'जब मानवता की सीमाएं पार की जाती हैं, तो प्रतिक्रिया निर्णायक होती है। न्याय मिलता है, भारत एकजुट है।'

ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र

भारतीय सेना ने आतंकियों (Pahalgam Terror Attack) को चेतावनी देते हुए कहा है कि, 'कुछ सीमाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें कभी पार नहीं करना चाहिए।' सेना ने अपनी इस पोस्ट में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया है।

रक्षा मंत्री ने की भारतीय सेना की तारीफ, बधाई भी दी

पहलगाम आतंकी हमले से दो दिन पहले 19 अप्रेल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा, ऑपरेशन सिंदूर बड़ी सफलता थी। मैं देश की सेना के बहादुर जवानों को बधाई देता हूं।

यहां आज भी हरे हैं जख्म

इंडियन एयर फोर्स के कॉर्पोरल तागे हैल्यांग का परिवार उनकी याद को जिंदा रखने और उनकी मौत के हालात को सामने लाने के मकसद से उनके सम्मान में एक स्मारक का उद्घाटन करने की तैयारी कर रहा है। दरअसल उनके परिवार ने अरुणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिले में उनके गांव ताजांग के पास एक स्मारक बनवाया है, इसके केंद्र में उस एयरमैन की कांस्य प्रतिमा लगी है। जिसने पालगाम आतंकी हमले में अपनी जान गंवा दी थी।

हमेशा जिंदा रखना चाहते हैं यादें

उनके बड़े भाई तागे टाका के मुताबिक, वे उनकी याद को जिंदा रखना चाहते हैं और दुनिया को बताना चाहते हैं कि तागे हैल्यांग जैसा भी कोई इंसान था, जिसने इस तरह (Pahalgam Terror Attack) अपनी जान गंवा दी । वे कहते हैं कि वे चाहते हैं कि लोगों को पता चले कि उनकी मौत क्यों हुई, इसलिए इसके लिए उन्होंने एक लेख भी तैयार किया है, जो इस स्मारक के साथ लगाया जाएगा।

हमले से 4 महीने पहले ही हुई थी शादी

बता दें कि हैल्यांग 2017 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे और उनकी पोस्टिंग श्रीनगर बेस पर थी। हमले से चार महीने पहले ही उनकी शादी चारो कामहुआ से हुई थी। असम के डिब्रूगढ़ स्थित वायु सेना बेस पर अपनी नई पोस्टिंग पर जाने से पहले, वह पत्नी चारो के साथ पहलगाम में छुट्टियां मना रहे थे।

मां का हाल देखा नहीं जाता, पिता भी बेहाल, अब लौट आए हैं भाई

टाका के मुताबिक, इस नुकसान का भावनात्मक असर परिवार पर अब भी बना हुआ है, खासकर उनके बुजुर्ग माता-पिता के चेहरे मुर्झा गए हैं। वे बताते हैं कि उन्हें उनकी चिंता होती है। क्यों कि वे खुद भी एक पिता हैं और वे उनके बेटे को खोने का दर्द समझ सकते हैं। वे कहते हैं कि उनके पिता तो ठीक, लेकिन मां का हाल देखा नहीं जाता। एक साल होने में एक दिन ही है, लेकिन वो जख्म आज भी ताजा हैं।

उनके एक और भाई, तागे माली, जो सेना में सेवारत हैं। वे भी परिवार के पास लौट आए हैं, ताकि भाई की याद में होने वाले स्मारक समारोह की तैयारियां कर सकें।