
जमीन की रजिस्ट्री, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Indore news: अब गांवों में जमीन के मालिकाना हक का दस्तावेज बनवाने के लिए लोगों को बार-बार पंजीयन कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री करने की जिम्मेदारी पंचायत और जिला परिषद के अधिकारियों को दी गई है। इसके लिए पंजीयन विभाग ने रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर को भी सरल किया है ताकि अधिकृत अधिकारी आसानी से प्रक्रिया पूरी कर सकें। हालांकि रजिस्ट्री का पूरा रिकॉर्ड पंजीयन विभाग के पास भी पहुंचेगा। इसका उद्देश्य भविष्य में जमीन की दोबारा रजिस्ट्री या अन्य लेन-देन के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी रोकना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शुरू होने वाले इस अभियान में ऐसे लोगों की रजिस्ट्री की जाएगी जो वर्षों से जमीन पर रह रहे हैं, लेकिन उनके पास मालिकाना हक साबित करने के पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं। योजना के तहत पात्र लोगों को जमीन का वैध दस्तावेज मिलने से बैंक लोन लेने समेत अन्य कानूनी और वित्तीय औपचारिकताएं पूरी करने में आसानी होंगी।
पंजीयन विभाग के अधिकारियों के अनुसार राजस्व और पंचायत विभाग के अधिकारियों को इसके लिए अधिकृत किया गया है। वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे पात्र लोगों की सूची तैयार कर रहे हैं। रजिस्ट्री सामान्य प्रक्रिया की तरह ही होगी, हालांकि योजना के तहत कुछ शुल्क में छूट दी गई है।
वहीं पंजीयन विभाग की बहुप्रतीक्षित एनीव्हेयर रजिस्ट्री योजना की शुरुआत की तारीख भी आगे बढ़ा दी गई है। पहले इसे कल से शुरू किया जाना था, लेकिन अब नई तारीख बाद में तय होगी। योजना लागू होने के बाद जमीन या प्लॉट किसी दूसरे जिले में होने के बावजूद व्यक्ति अपनी पसंद के जिले के पंजीयन कार्यालय में रजिस्ट्री करा सकेगा। इसके लिए स्लॉट बुक करना होगा। स्लॉट सामान्यत: सात दिन आगे का मिलेगा। इस अवधि में संबंधित पंजीयन कार्यालय को करीब पांच दिन जांच के लिए मिलेंगे। दस्तावेजों की जांच के बाद ओके रिपोर्ट मिलने पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद आवेदक को चुने गए जिले में ही सामान्य प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्री करानी होगी।
Updated on:
16 Sept 2026 02:04 pm
Published on:
16 Sept 2026 02:04 pm
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