
बहन को गिफ्ट में मेडिक्लेम पॉलिसी दे रहे भाई (Photo Source- Patrika Input)
मनीष यादव की रिपोर्ट
Rakshabandhan Gift : रक्षाबंधन एक ऐसा पर्व है, जो भाई-बहन के रिश्ते को स्नेह, समर्पण और सुरक्षा के धागे में बांधता है। इस दिन हर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती है, और भाई उसे उपहार स्वरूप अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है। मगर मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के कुछ भाई इस परंपरा को केवल प्रतीकात्मक न मानते हुए इसे एक गहन और व्यावहारिक रूप दे रहे हैं। इन भाइयों ने अपनी बहनों को सिर्फ उपहार या मिठाइयां नहीं दीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य और भविष्य की चिंता करते हुए उन्हें मेडिक्लेम पॉलिसी का ऐसा अनमोल तोहफा दिया है, जो न केवल आज बल्कि आने वाले कई वर्षों तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
राखी के दिन वे हर साल इस पॉलिसी का प्रीमियम भी प्रेमपूर्वक खुद भरते हैं। ये जिम्मेदारी का भाव दर्शाता है कि, बहनों की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से भी निभाई जा सकती है। बेटमा निवासी शेखर मकवाना इस पहल के प्रेरणास्रोत रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उनके बहनोई का एक्सीडेंट हो गया था, इसमें वो तो कम घायल हुए थे, लेकिन साथ में बैठा अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था, इसी के चलते वो कई दिनों तक अपना मुल काम किसी तक नहीं कर पाया था।
इसके बाद करोना काल में जब कई परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, तब उन्होंने महसूस किया कि इलाज के अभाव में कितने लोग परेशान हुए। उस कठिन समय में काम-धंधे बंद थे और ऊपर से अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसका इलाज एक अतिरिक्त बोझ बन जाता था। उसी अनुभव ने उन्हें ये सोचने पर मजबूर किया कि, भविष्य में ऐसी परिस्थिति दोबारा न आए, इसलिए उन्होंने अपनी बहनों को मेडिक्लेम पॉलिसी देने का संकल्प लिया।
सबसे बड़ी बात ये है कि, ये मेडिक्लेम पॉलिसी सिर्फ बहनों तक सीमित नहीं है। कुछ भाई अपनी बहनों के पूरे परिवार के लिए भी स्वास्थ्य बीमा करवाने लगे हैं। ये पहल एक नई सोच और मानवीय दृष्टिकोण का परिचायक है, जिसमें उपहार का रूप भले ही पारंपरिक न हो, लेकिन उसका असर स्थायी और प्रभावशाली है।
शेखर ने शुरुआत अपनी बहन बबिता सांखला की पॉलिसी बनवाकर की। इसके बाद उन्होंने अपने रिश्तेदारों में भी यही विचार फैलाया। उन्होंने अन्य भाइयों को भी प्रेरित किया कि, वे भी अपनी बहनों के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए ऐसी पहल करें। उनकी इस सोच का असर भी हुआ। पास में रहने वाले अजय दयाल ने भी अपने परिवार में इस परंपरा की शुरुआत की। अब हर साल रक्षाबंधन पर, ये भाई अपनी बहनों को अन्य उपहारों के साथ-साथ मेडिक्लेम पॉलिसी का प्रीमियम भरते हैं।
अजय दयाल की बहन बबीता को हर साल 8 हजार रुपए दिए जाते हैं, ताकि वो खुद अपना प्रीमियम भर सकें या सीधे ऑनलाइन प्रीमियम जमा कर दिया जाता है। बहन को भी ऑनलाइन प्रीमियम भरना सिखाया। इससे उनकी बहन न सिर्फ स्वास्थ्य रूप से सुरक्षित रहती हैं, बल्कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में उन्हें आर्थिक रूप से किसी के सामने हाथ फैलाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
Updated on:
09 Aug 2025 10:12 am
Published on:
09 Aug 2025 09:41 am
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