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इंदौर में मां की ममता की अजब मिसाल, बुजुर्ग माता ने बेटे को दान की अपनी किडनी

Mother Love : 55 साल की बुजुर्ग मां ने अपने जवान बेटे की जान बचाने के लिए उसे अपनी एक किडनी दान कर दी। सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सातवीं बाक किडनी ट्रांसप्लांट की गई।

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Mother Love

बुजुर्ग मां ने बेटे को दान की किडनी (Photo Source- Patrika)

Mother Love in Indore :मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में 7वां किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। 56 वर्षीय मां ने अपने बेटे को किडनी देकर उसे नया जीवन दिया। ट्रांसप्लांट के बाद 20 मई को मरीज की छुट्टी भी कर दी गई है। डॉक्टरों के अनुसार, मां और बेटे दोनों स्वस्थ हैं और तेजी से रिकवरी कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, 37 वर्षीय मरीज योगेश लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। एक साल पहले जांच के दौरान उसकी दोनों किडनियां फेल बताई गई थी। एक साल से उसका इलाज चल रहा था। वो नियमित डायलिसिस पर निर्भर था। लगातार बिगड़ती हालत के बीच परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त डोनर की थी। जांच के दौरान उसकी मां की किडनी उससे मैच हो गई, जिसके बाद उन्होंने बिना देर किए बेटे को जीवनदान देने का फैसला लिया।

आयुष्मान योजना के तहत ट्रांसप्लांट

डॉ. पद्मिनी सरकानूनगो और अस्पताल डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक किडनी ट्रसप्लांट किया। ट्रांसप्लांट टीम में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर विभाग के डॉक्टर शामिल रहे। डॉक्टरों ने बताया, ये ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सभी जरूरी मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया गया। दो से तीन मरीज वेटिंग में भी हैं। ये ट्रांसप्लांट आयुष्मान योजना के तहत किया गया है।

लिवर ट्रांसप्लांट को लेकर संसाधन नहीं

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लिवर ट्रांसप्लांट सेवा अब भी शुरू नहीं हो सकी है। अस्पताल में करीब एक साल पहले लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू करने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक यह सेवा धरातल पर नहीं उतर पाई है। इसकी सबसे बड़ी वजह प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टरों और जरूरी संसाधनों की कमी बताई जा रही है। लिवर ट्रांसप्लांट के लिए अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, विशेष आइसीयू, प्रशिक्षित सर्जन, हेपेटोलॉजिस्ट और टेक्निकल स्टाफ की जरूरत होती है।

लंबे समय से गंभीर समस्या से जूझ रहा था योगेश

बताया जा रहा है कि, योगेश लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। एक साल पहले जांच के दौरान उसकी दोनों किडनियां फेल होना बताई गई थीं। एक साल से उसका इलाज चल रहा था। वो नियमित रूप से डायलिसिस पर निर्भर था। लगातार बिगड़ती हालत के बीच परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त डोनर की थी। जांच के दौरान उसकी मां की किडनी उससे मैच हो गई, जिसके बाद मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने बिना देर किए बेटे को जीवनदान देने का फैसला लिया और आखिरकार बेटे को एक किडनी दान कर दी। फिलहाल, ताजा अपडेट के अनुसार, ट्रांसप्लांट किडनी अच्छी तरह वर्किंग में है, जबकि मां भी तेजी से रिकवर कर रही हैं।