
इंदौर। खासगी ट्रस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया। शीर्ष कोर्ट ने ट्रस्टियों की ओर से हाईकोर्ट के फैसले पर दायर अपील स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि खासगी एक पब्लिक ट्रस्ट है। इसकी संपत्तियां ट्रस्ट के अधीन रहेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने विक्रय-हस्तांतरण के संबंध में जांच ईओडब्ल्यू से करवाने का हाईकोर्ट का आदेश भी रद्द कर दिया। निर्देश दिए कि ट्रस्ट की आर्थिक अनियमितताओं की जांच रजिस्ट्रार से करवाई जाए और ट्रस्ट एक माह के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करे। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट, ट्रस्टियों व एक अन्य याचिका पर गुरुवार को 71 पेज का फैसला जारी किया।
तीन सदस्यीय खंडपीठ में जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस अभय एस. ओका व जस्टिस सीटी रविकुमार ने सुनवाई की। हाईकोर्ट द्वारा अक्टूबर-2020 में इंदौर कलेक्टर के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर खासगी संपत्तियों को सरकार के अधीन कर दिया था।
इसके बाद प्रशासन ने इंदौर सहित देशभर में मौजूद खासगी संपत्तियों का आधिपत्य ले लिया था। ट्रस्टियों द्वारा संपत्तियां बेचने की जांच भी कोर्ट ने आर्थिक अपराध व अनुसंधान ब्यूरो से करवाने के निर्देश दिए थे। ट्रस्टियों ने दोनों आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी दायर की थी। प्रदेश सरकार व प्रशासन की ओर से अभिभाषक बलवीर सिंह ने दलीलें पेश कीं।
कहां-कहां खासगी संपत्तियां
होलकर महाराजाओं की खासगी संपत्तियां देशभर में हैं। इंदौर में कई मंदिर व इनसे जुड़ी जमीनें हैं। मंदिरों में हरसिद्धी मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, केसरबाग रोड स्थित शिव मंदिर सहित अन्य हैं। इनके अलावा वाराणसी, मंदसौर, रामेश्वरम, महाराष्ट्र के अनेक धार्मिक स्थलों पर मंदिर, धर्मशालाएं व अन्य क्षेत्रों का संचालन हो रहा है।
नियम-कानून से किया जाए संचालन
कोर्ट ने कहा, खासगी संपत्तियां ट्रस्ट के अधीन ही रहेंगी। 1972 की अनुपूरक ट्रस्ट डीड मान्य होगी। कोर्ट ने ट्रस्टियों से कहा कि आगे से खासगी संपत्तियों का हस्तांतरण सरकार की बिना अनुमति नहीं किया जाए। इसकी व्यवस्था सुचारू बनाने रजिस्ट्रार लोक न्यास कार्य करें। ट्रस्ट को अब तक विक्रय या हस्तांतरित की गई संपत्तियों का हिसाब देना होगा।
Published on:
22 Jul 2022 01:30 pm
