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दिवाली पर 80 फीसदी घट गया ‘मेड इन चाइना’ का बाजार

खरीदारों के साथ-साथ दुकानदारों में स्वदेशी सामान को बढावा देने की भावना से चीनी सामान की बाजार हिस्सेदारी घटकर करीब 20 फीसदी रह गर्इ है।
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Saurabh Sharma

Nov 03, 2018

business news

दिवाली पर 80 फीसदी घट गया 'मेड इन चाइना' का बाजार

नर्इ दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों से चीन से आयातित सस्ते उत्पादों से पटे रहने वाले दीपावली के बाजार में इस बार स्वदेशी उत्पादों की धूम है। खरीदारों के साथ-साथ दुकानदारों में स्वदेशी सामान को बढावा देने की भावना से चीनी सामान की बाजार हिस्सेदारी घटकर करीब 20 फीसदी रह गर्इ है। हर साल की तरह इस बार भी दिवाली से पहले बाजार दीपक, कंदील, फूल, रंगोली, रंग-बिरंगी लड़यिों, परदे, बंदनवार,लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों तथा अन्य साजो-सामान से सजे हैं लेकिन चीनी सामान की घटती धमक की छाप पूरे बाजार पर है। खरीदार भी अब सामान लेने से पहले देश में निर्मित सामान दिखाने की मांग करते हैं।

इसलिए कम हुर्इ चीन के सामान की मांग
पिछले कई साल से अन्य त्योहारों की तरह इस पर्व पर भी 'मेड इन चाइना’ का कब्जा रहा था और बाजार में चीन की लड़ियां, गिफ्ट आइटम, मूर्तियों, सजावटी सामान की धूम रहती थी। लेकिन, स्वदेशी सामान को बढ़ावा देने तथा पाकिस्तान का समर्थन करने के कारण चीन के सामान के बहिष्कार के बारे में सोशल मीडिया पर जारी चर्चाओं ने बाजार को पूरी तरह बदल दिया है। दिल्ली में लाल किला के सामने भागीरथ पैलेस का इलेक्ट्रॉनिक बाजार इस परिवर्तन का सबसे बड़ा गवाह है। खरीदार अब सस्ते सामान की अपेक्षा गुणवत्ता पर ध्यान देने लगे हैं और सरकार ने भी अपने नियम सख्त कर दिए हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक बाजार पर इस साल नया चीनी माल नहीं आने का भी असर है। रेहड़ी और पटरी पर जो चीनी माल दिखार्इ देता है वह पिछले साल का बचा हुआ है।


ड्रैगन की पकड़ हुर्इ खत्म
भागीरथ पैलेस में दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव रविंदर कुमार गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक बाजार पर पहले पूरी तरह चीनी सामान हावी था, लेकिन सरकार ने गुणवत्ता को लेकर मानक सख्त कर दिए हैं। दरअसल पहले चीन के माल पर बीएसई मानक का स्टीकर लग जाता था लेकिन सरकार ने अब आयातित माल पर इसकी खुदाई करने का निर्देश दिया है। इस बार इलेक्ट्रॉनिक बाजार में बिक्री 50 फीसदी घट गर्इ है। गिफ्ट आइटम के बाजार पर भी 'ड्रैगन’ की पकड़ खत्म हो गर्इ है। बाजार में अब गिफ्ट आइटम कम ही दिख रहे हैं। अब अधिकतर गिफ्ट आइटम की खरीदारी ऑनलाइन हो रही है।

60 फीसदी कम हुर्इ बिक्री
बाजार में अब इंडोनेशिया से आयातित माल अधिक है लेकिन वहां से आया माल महंगा होता है, जिसके कारण इसकी पकड़ उतनी नहीं है। सदर बाजार में गिफ्ट आइटम बेचने वाली आकांक्षा बताती हैं कि उनकी बिक्री पिछले साल की तुलना में इस बार 60 फीसदी घट गयी है और इसी कारण वह अब अपनी दुकान में सजावटी सामान भी बेचने लगी हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर ग्राहक खरीदारी से पहले पूछते हैं कि क्या यह माल चीन का है और यह बताने पर कि अमूक सामान देश में निर्मित है तब ही वे उसे लेने में दिलचस्पी दिखाते हैं।

राजस्थानी दीयों की डिमांड ज्यादा
कनारी बाजार में बंदनवार और अन्य सजावटी सामान बेचने वाली प्रीति ने बताया कि उनकी दुकान में सिर्फ राजस्थान का माल है। एक अन्य दुकानदार पूर्णिमा गुप्ता ने बताया कि वह राजस्थान के अलवर से माल लार्इ हैं और ग्राहकी अच्छी चल रही है। मालीवाड़ा में दीये, मूर्तियां और बंदनवार की दुकान लगाये करण ने कहा कि उन्होंने कोलकाता और लखनऊ से माल मंगाया है। पोस्टर बेचने वाले सोनू कुमार ने बताया कि अब चीन का माल महंगा हो गया है। बड़ा पोस्टर पहले वहां से 44-45 रुपए का पड़ता था, लेकिन अब वह 47-48 रुपए का पडऩे लगा है। हम उसे बाजार में 60 रुपए का बेचते हैं। हर दिन अभी 20 से 25 हजार की बिक्री है लेकिन यह पिछले साल से 20 फीसदी कम है। अखिल भारतीय व्यापारी महासंघ (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि उनका संगठन गत दो साल से चीन के माल के बहिष्कार को लेकर अभियान चला रहा है और बाजार में इस अभियान का असर दिखने लगा है।