
नई दिल्ली। देश में बेहतर गन्ना उत्पादन के कारण सस्ती चीनी का लुत्फ उठा रहे देशवासियों को केंद्र सरकार जल्द ही मीठा झटका दे सकती है। दरअसल 4 मई को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की बैठक होने वाली है। इस बैठक में जीएसटी काउंसिंल चीनी पर सेस लगा सकती है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि जीएसटी काउंसिल की बैठक चीनी पर सेस लगाने पर फैसला हो सकता है। इस वरिष्ठ अधिकारी के इस सेस से एकत्र होने वाली धनराशि से चीनी मिलें गन्ना किसानों का बकाया चुकाएंगी। आपको बता दें कि इस साल मार्च तक पूरे देश में गन्ना किसानों का करीब 19,780 करोड़ रुपए चीनी मिलों पर बकाया था। इसमें भी बड़ी राशि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों के किसानों की है।
1 से 2 रुपए प्रतिकिलो तक बढ़ सकते हैं दाम
सूत्रों के अनुसार यदि जीएसटी काउंसिल की बैठक में सेस लगाने पर सहमति बनती है तो चीनी के दामों में 1 से 2 रुपए की बढ़ोत्तरी हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि चीनी पर जीएसटी काउंसिल की ओर से 1 से 1.5 रुपए तक का सेस लगाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार पर 2012 की रंगराजन कमेटी के अनुसार गन्ने की कीमत देने के दबाव है। एेसे में केंद्र सरकार चीनी पर सेस लगाने को मंजूरी दे सकती है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार का यह कदम उसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में संजीवनी दे सकता है। इसका कारण यह है कि केंद्र की मोदी सरकार शुरू से ही किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने की बात करती आ रही है।
ये थी रंगराजन कमेटी की सिफारिश
केंद्र की पूर्ववर्ती सरकार ने देश के गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रधानमंत्र की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने 2012 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वसूली का 75 फीसदी या बायप्रोडक्ट का 70 फीसदी हिस्सा गन्ना किसानों को मिलना चाहिए। इस समय चीनी 2800 रुपए प्रति क्विंटल है। यदि केंद्र की मोदी सरकार रंगराजन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर गन्ना किसानों को भुगतान करती है तो चीनी की दरों के आधार पर उसे 226.80 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान करना होगा।
Published on:
27 Apr 2018 05:54 pm
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