
Food packaging
Food packaging: पॉलीथिन मेें पैक चाय से लेकर होटल से प्लास्टिक के डिब्बों में पैक कराई गई सब्जी, दाल या रायता हमारे शरीर में हानिकारक रसायन पहुंचा रहे हैं। ये रसायन कैंसर का कारण बन रहे हैं। प्लास्टिक के डिब्बे में नूडल्स, मिठाई से लेकर अन्य व्यंजन का चलन बढ़ गया है। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के पैक्ड खाद्य सामग्री के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए शोध में भी इसका खुलासा हुआ है।
वैज्ञानिक डॉ. पीआर देव के अनुसार प्लास्टिक में मौजूद कुछ रसायन, जैसे कि बिसफेनॉल ए (बीपीए) और फथलेट्स, कैंसर का कारण बन सकते हैं।
प्लास्टिक के इन कणों का व्यास पांच मिलीमीटर से कम होता है। ये इंसान के खून और वायु मार्ग में अपना रास्ता खोज रहे हैं। अध्ययनों के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक से फेफड़ों में सूजन आ सकती है। ये कण प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये कैंसर जैसी बीमारियों का कारण भी बनते हैं। प्रजनन और विकास सम्बंधी समस्याओं के भी कारण हैं।
शोध में 12 प्रकार के प्लास्टिक की पहचान की है, जिसमें पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलिथीन के साथ ही टेरेफ्थेलेट और राल शामिल हैं। माइक्रोप्लास्टिक के सबसे खतरनाक स्रोतों में धूल, कपड़ा और टायर भी शामिल हैं। कई खाद्य और पेय पदार्थ भी शरीर में माइक्रोप्लास्टिक भर रहे हैं। ये ब्लड और फेफड़ों में भर जाते हैं। माइक्रोप्लास्टिक व अन्य हानिकारक रसायन शरीर में पहुंचने पर कैंसर, अस्थमा, हार्ट अटैक का खतरा बढ़ गया है। एससीआई के विशेषज्ञ भी पेट के कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए पैक्ड खाद्य सामग्री का उपयोग न करने की सलाह दे रहे हैं।
‘प्लोस वन जर्नल’ के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक रक्त वाहिकाओं के माध्यम से संवहनी ऊतक तक जा सकते हैं। ‘यूनिवर्सिटी ऑफ हल’ और ‘हल यार्क मेडिकल स्कूल टीम’ ने इस अध्ययन का विश्लेषण तब किया, जब दिल की बाईपास सर्जरी करा रहे एक मरीज की नस के ऊतक की जांच की गई। उस दौरान माइक्रोप्लास्टिक के कण और पांच अलग अलग प्रकार के बहुलक पाए गए। स्विटजरलैंड में हुए रिसर्च में पाया गया कि पैकेजिंग से इंसान के शरीर में 3600 से ज्यादा रसायन पहुंच रहे हैं। उनमें से 100 से ज्यादा रसायन हानिकारक हैं। इनमें हार्मोन में रुकावट पैदा करने वाला बिस्फेनॉल ए भी शामिल है।
फूड पैकेजिंग में प्लास्टिक के डिब्बे, कैरीबैग सेे माइक्रोप्लास्टिक और हानिकारक रसायन शरीर में पहुंचते हैं। इससे पेट से लेकर फेंफड़े व अन्य कैंसर, हार्मोनल असंतुलन खतरा बढ़ जाता है। पेट से संबंधित कैंसर के मामले जबलपुर समेत आसपास के क्षेत्र से ज्यादा संख्या में आ रहे हैं।
Updated on:
17 Oct 2024 05:17 pm
Published on:
17 Oct 2024 03:02 pm
