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जबलपुर। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेडिकल में जल्द ही सर्वसुविधायुक्त वातावरण में मरीजों का उपचार किया जा सकेगा। इसके लिए केन्द्रीय स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि कुछ खामियां भी निकलकर आई हैं, जिन्हें दुरुस्त करने की कवायद चल रही है। जानकारी के अनुसार मेडिकल अस्पताल में सुरक्षा, सफाई और श्रम का ठेका दोगुने में दिए जाने के बाद भी व्यवस्था जस के तस हैं। जबकि अस्पताल प्रशासन व्यवस्थाएं बेहतर होने का दावा कर रहा है। मालूम हो कि पुरानी एजेंसी को दिए जाने वाले प्रतिमाह ५५ लाख रुपए से बढ़ाकर केंद्रीय एजेंसी को लगभग एक करोड़ रुपए प्रतिमाह का दिया गया है। इस एजेंसी ने एक फरवरी से श्रम और सुरक्षा के कार्य शुरू किए हैं, सफाई का काम एक अप्रैल से करेगी।
आसानी से नहीं मिल रही पर्ची- अनुबंध के अनुसार ओपीडी में आठ पर्ची काउंटर बनाए जाना हैं। फिलहाल पांच काउंटर ही होने से लोगों को लम्बी लाइन में लगना पड़ रहा है। रीवा से आए दिलीप सिंह ने बताया कि उनकी बीमार बेटी बाहर बैठी है, वे पर्ची के लिए एक घंटे से लाइन में हैं। कंधे पर बच्चे को लेकर खड़े आशीष यादव ने बताया काफी देर से पर्ची के लिए परेशान हो रहे हैं।
हेल्प डेस्क का उपयोग नहीं
ओपीडी में हेल्प डेस्क वाला स्थान महिलाओं की लाइन से घिरा होने से इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। शिकायतों के निराकरण के लिए चार कर्मचारियों का कम्प्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम बनाया गया है, जो कहीं नजर नहीं आ रहा है।
किसके कितने कर्मचारी
कार्य केंद्रीय एजेंसी पुरानी एजेंसी
सुरक्षा १२८ ९६
श्रम संसाधन २३७ २१०
सफाई १९८ १२६
(सफाई कार्य केंद्रीय एजेंसी एक अप्रैल से करेगी)
हेल्प डेस्क का स्थान बदला जाएगा। ओपीडी के लिए चार कम्प्यूटर और मंगाए जा रहे हैं। आठों काउंटर से पर्ची कटेगी और शुल्क भी जमा होगा। जल्द ही सुविधाएं और बेहतर हो जाएगी।
- डॉ. राजेश तिवारी, अधीक्षक, मेडिकल अस्पताल
Published on:
07 Feb 2018 12:07 pm
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