
Hyderabad Horses Death in MP: हैदराबाद से जबलपुर भेजे गए 57 घोड़ों में से 8 की मौत से मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि, हैदराबाद से दिल्ली तक हड़कंप मच गया है। अब मामले में जल्द ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। दरअसल जबलपुर में आए इस मामले में शहर के पशु प्रेमी आगे आए हैं। शहर के पीपल्स फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) से जुड़े पशु प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि हॉर्स पावर स्पोर्ट्स लिमिटेड (HPSL) पर पेटा के छापामारी के बाद सामने आया कि घोड़ों को छिपाने के लिए जबलपुर भेज दिया गया। उनका आरोप है कि हैदराबाद में घोड़ों की रेस पर ऑनलाइन बेटिंग की जा रही थी, फिलिपिंस में बैठे लोग घोड़ों पर लाखों-करोड़ों का दांव लगा रहे थे।
जबलपुर भेजे गए ये घोड़े थोरो और काठियावाड़ी प्रजाति के हैं और इनकी कीमत लाखों रुपए है। सड़क के रास्ते से जबलपुर लाए गए इन घोड़ों को अभी पांच दिन ही हुए थे कि एक के बाद एक 8 घोड़ों की मौत हो गई। 5 दिन में लगातार मौत से जबलपुर में हड़कंप मच गया। बता दें कि एक्टिविस्ट मेनका गांधी ने ही यह जानकारी सार्वजनिक की थी कि हैदराबाद से घोड़ों को जबलपुर भेजा गया है। इसके बाद ही टीम को तुरंत जबलपुर भेजकर जांच करवाई गई। बता दें कि इन घोड़ों को जिले के रैपुरा गांव में एक निजी रेस कोर्स में भेजा गया था।
बेशकीमती इन 8 घोडो़ं की मौत की रिपोर्ट कलेक्टर दीपक सक्सेना ने राज्य सरकार को भेजी इसके बाद भोपाल से पशु विभाग की तीन सदस्यीय टीम जबलपुर पहुंची। ग्लैंडर्स बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद भोपाल से लेकर दिल्ली और हैदाराबाद तक हड़कंप मच गया। इस टीम में डॉ. जयंत तापसे, डॉ. सुनील तुमडिया और डॉ. शाहीकिरण शामिल थे।
तीनों ने पनागर के रैपुरा गांव पहुंचकर घोड़ों के अस्तबल का निरीक्षण किया और घोड़ों से लिए गए सैंपल देखे। इसके बाद उन्होंने नेशनल एक्शन प्रोटोकाल के तहत किए गए कामों की रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद टीम वापस भोपाल लौट आई। इधर जबलपुर पशु विभाग द्वारा घोड़ों की हर एक्टिविटी पर नजर रखी जा रही है।
जांच के दौरान टीम ने पाया कि घोड़े जिस अनुकूल स्थिति में रखे जाने चाहिए थे, वो यहां नहीं थीं। जिस टीन शेड के नीचे घोड़े रखे गए थे, वह काफी नीचा था, जिससे घोड़ों को गर्मी लग रही थी। यहां तक कि वहां उनके खाने-पीने की व्यवस्था पर भी टीम ने सवाल उठा दिए। इस रिपोर्ट पर जल्द एक्शन लेने की बात भी कही गई है।
बताया जा रहा है कि जहां घोड़ों को दफनाया गया है, इसके लिए राजस्व विभाग से जमीन चिह्नित कराई गई। उसके बाद ग्लैंडर्स बीमारी के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए प्रोटोकाल के तहत एक्शन लेते हुए, घोड़ों को यहां दफनाया गया है, ताकि उस जमीन के आसपास से कोई आ-जा न सके।
बता दें कि इसके सैंपल जांच के लिए हिसार स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर भेजे गए थे। अब तक 44 घोड़ों की रिपोर्ट आई है, वहीं 5 घोडो़ं की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। वहीं 44 में से 4 घोड़ों के सैंपल जांच के लिए दोबारा भेजे गए हैं। इसके साथ ही विभाग ने तत्परता दिखाते हुए अन्य सभी घोड़ों को आइसोलेट कर दिया है।
ग्लैंडर्स एक जीवाणु संक्रमण रोग है। यह 'बर्कहोल्डरिया मैलेई' नामक जीवाणु के कारण होती है। यह घोड़ों को प्रभावित करती है और मनुष्यों में भी फैल सकती है। ग्लैंडर्स एक तरह से त्वचा का रोग है, जिसमें त्वचा के नीचे गांठें और अल्सर हो जाते हैं। इसके अलावा तीव्र रूप में नाक से स्राव, खांसी, तेज बुखार और नाक के श्लेष्म का अल्सर होता है। इन लक्षणों के कारण सांस लेने में परेशानी भी होती है। यह बीमारी खासतौर पर दूषित भोजन, पानी की वजह होती है।
मामले में पशु चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर प्रफुल्ल मून का कहना है कि, घोड़ों के 44 सैंपल निगेटिव आए हैं, लेकिन चार घोड़ों के सैंपल एक बार फिर जांच के लिए भेजे गए हैं। वहीं शेष पांच घोड़ों के सैंपल अभी नहीं आए हैं। इन घोड़ों में ग्लैंडर्स बीमारी के लक्षण मिले थे, जिसके बाद नेशनल एक्शन प्रोटोकाल के तहत काम किया गया।
Updated on:
24 May 2025 01:23 pm
Published on:
24 May 2025 01:22 pm
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