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इंडियन रेलवे ने इस रेल जोन से छीना हमसफर ट्रेन का रैक, हैरान करने वाली है वजह

कोलकाता के लिए फुल एससी सुपरफास्ट दौड़ाने की योजना खटाई में

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जबलपुर। भारतीय रेल ने पश्चिम मध्य रेलवे को दिए पहले हमसफर ट्रेन का रैक छीन लिया है। इस फुल एसी ट्रेन के रैक को जबलपुर-सांतरागाची के बीच दौड़ाए जाने की घोषणा की गई थी। लेकिन रेलवे बोर्ड से आए नए फरमान से शहर से पहली हमसफर ट्रेन का सफर फिलहाल शुरू होने से पहले ही थमता नजर आ रहा है। ट्रेन का यह नया रैक बीते कई दिनों से पमरे के यार्ड में खड़ा था। रेल बोर्ड ने शुक्रवार को हमसफर के नए रैक को कामाख्या भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद रैक को कामाख्या रवाना कर दिया है। इसके साथ ही शहर की पहली हमसफर ट्रेन के संचालन की योजना ही खटाई में पडऩे का अंदेशा गहरा गया है।

धरी रह गई तैयारी
हमसफर एक्सप्रेस को चलाने की घोषणा पिछले साल अक्टूबर में की गई थी। नवंबर से जारी रेलवे के नए टाइम टेबिल में भी जबलपुर-सांतरागाची हमसफर एक्सप्रेस को शामिल किया जा चुका है। इस टे्रन के नंबर 22193/22194 भी निर्धारित किए जा चुके हैं। इसके बाद पश्चिम मध्य रेल ने जबलपुर-सांतरागाची के बीच हमसफर को चलाने की तैयारी पूरी कर ली थी। सिर्फ रेल बोर्ड से ट्रेन संचालन शुरू करने की तारीख मिलने का इंतजार किया जा रहा था। लेकिन तीन महीने से रैक आकर यहां खड़ा रहने के बावजूद रेलवे बोर्ड टे्रन के शुभारंभ की तिथि निर्धारित नहीं कर पाया, उल्टे रैक को ही छिन लिया गया।

चार राज्यों को फायदा
16 कोच वाली हमसफर सुपरफास्टट ट्रेन में एसी फस्र्ट, एसी सेकेंड और एसी थ्री के कोच है। शहर से कोलकाता के लिए पमरे की यह दूसरी ट्रेन थी, जिसमें बिलासपुर होकर चलाने की योजना है। इस ट्रैक पर जबलपुर-सांतरागाची के बीच हमसफर दौड़ाए जाने से चार राज्यों के यात्रियों को फायदा मिलता। छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल के साथ ही झारखंड एवं उड़ीसा के लोगों को भी एसी ट्रेन का विकल्प मुहैया होता। हमसफर ट्रेन का कोलकाता तक जल्द संचालन शुरू किए जाने शहर में रह रहे बंगवासी भी लंबे समय से मांग कर रहे थे। ट्रेन को सांतरागाची की बजाय हावड़ा या शालीमार से जोडऩे भी आवाज उठ रही है।

इससे पहले भी हुई थी कोशिश
रेलवे बोर्ड द्वारा जबलपुर-सांतरागाची ट्रेन के लिए भेजे गए हमसफर के रैक को पहले भी छीनने की कोशिश हुई थी। रेल बोर्ड ने हमसफर के बोर्ड को खडग़पुर भेजने की रुपरेखा तैयार की थी। उस वक्त यह बात कही जा रही थी कि ट्रेन को खडग़पुर को सौंपने के बाद हमसफर के रैक को सप्ताह में एक दिन जबलपुर के लिए भेजा गया जाएगा। वहीं, खाली दिनों में रैक को खडग़पुर-पुणे के बीच संचालित किया जाएगा। लेकिन यह योजना ठंडी पड़ी तो बोर्ड ने अचानक हमसफर को कामख्या भेजने का फैसला कर जबलपुर से बड़ी सौगात को छीन लिया।

सांसद ने कहा फर्क नहीं पड़ता
रेलवे बोर्ड अब जब तक नया रैक आवंटित नहीं करेगा तब तक सांतरागाची तक हमसफर ट्रेन चलने की तिथि के निर्धारण का मामला फिलहाल खटाई में है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के जबलपुर सांसद राकेश सिंह का कहना है कि नए ट्रेन का रैक कामाख्या चले जाने से हमारी हमसफर को कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन जबलपुर से सांतरागाची के बीच हमसफर को जल्द संचालित किया जा सके इसके लिए रेल मंत्री से मुलाकात की जाएगी।