
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व जज व हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस गुलाब गुप्ता का बुधवार को स्थानीय निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से न्यायिक जगत में शोक व्याप्त है। गुरुवार को जस्टिस गुप्ता का अंतिम संस्कार स्थानीय रानीताल मुक्तिधाम में होगा।
शैक्षणिक क्षेत्र में भी जस्टिस गुलाब गुप्ता सक्रिय रहे। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उनका कार्यकाल यादगार रहा। भ्रष्टाचार उन्मूलन को लेकर उनकी रिपोर्ट काफी चर्चित रही। मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन के रूप में उन्होंने संवेदनशीलता से कार्य किया। सहज, सरल, शांत, अनुशासनप्रिय व्यक्तित्च के धनी जस्टिस गुप्ता गरीबों के हित के लिए तत्पर रहा करते थे। मध्य प्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के कानूनी सलाहकार के रूप में उनका मार्गदर्शन उल्लेखनीय रहा।
हाइकोर्ट बार एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदर्शमुनि त्रिवेदी ने बताया कि एक अधिवक्ता के रूप में गुलाब गुप्ता ने बार के उत्थान के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। वे हाई कोर्ट बार के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान बार का बौद्धिक स्तर बढ़ाने कार्य किया। जब हाई कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त हुए तो न्यायिक क्षेत्र में कई मानदंड स्थापित किए। हिंदी में सुनवाई व फैसले सुनाने को लेकर उनका नाम अग्रणी रहा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से पदोन्नत होकर वे हिमाचल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। इस जिम्मेदारी को भी उन्होंने बडी निपुणता से निभाया।
संक्षिप्त जीवनवृत्त
जन्म सरगुजा जिले में 1 मार्च 1933 को हुआ। इलाहाबाद विवि से बीए व एलएलबी करने के बाद उन्होंने 1958 में यूएसए से एलएलएम की डिग्री प्राप्त की। 20 जून 1983 से 23 अप्रैल 1994 तक मप्र हाइकोर्ट में न्यायाधीश रहे। 17 सितम्बर 1994 से 1 मार्च 1995 तक हिमाचल हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे। इसी पद से वे रिटायर हुए। बाद में उन्हें मप्र मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष भी बनाया गया।
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Published on:
08 Apr 2021 08:46 am
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