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जबलपुर। मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने थीसिस में चोरी और नकल रोकने के लिए कड़ा प्रावधान किया है। सुपर स्पेशलिटी और पीजी कोर्सेस के विद्यार्थियों से थीसिस की एक कॉपी डीवीडी में और चार हॉर्ड कॉपी मांगी हैं।
छात्रों को देना होगा प्रमाण
साथ ही विद्यार्थी को साहित्य चोरी नहीं की गई है का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। तभी विवि थिसिस को स्वीकार करेगा। इस निर्णय के साथ ही विवि ने सत्र 2017-2020 के मेडिकल सुपर स्पेशिलटी और पीजी कोर्सेस के छात्र-छात्राओं को थिसिस जमा करने का समय भी निर्धारित कर दिया है।
16 अगस्त तक दिया समय
विवि के अनुसार छात्र-छात्राओं को निर्धारित फॉर्मेट के साथ 16 अगस्त तक थिसिस जमा करना होगा। उसके बाद 30 अगस्त तक जमा करने पर डेढ़ हजार रुपए विलम्ब शुल्क लगेगा। उसके बाद 15 सितम्बर, 2019 तक थिसिस जमा करने वालों को विलम्ब शुल्क सहित निर्धारित फीस की दोगुनी रकम जमा करना पड़ेगा।
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दूसरे राउंड में भी नहीं भर पाईं यूजी की सीटें
ये कोर्स शामिल
पीजी कोर्सेस में मेडिकल, आयुर्वेद, होम्योपैथी में एमडी, एमडीएस और एमएस मेडिकल शामिल हैं। पैथोलॉजी और नर्सिंग से पीजी डिग्री के विद्यार्थियों को थिसिस की एक हॉर्ड कॉपी और एक कॉपी डीवीडी में विवि को जमा करना होगा। थिसिस में गाइड, एचओडी और डीन के हस्ताक्षर के बाद ही मान्य होगी।
रादुविवि को मिली ग्रांट राशि, विवि ने ली राहत
रादुविवि की लम्बे समय से अटकी ग्रांट राशि आखिरकार जारी कर दी गई है। इससे विवि प्रशासन को राहत मिली है। एक साल से ग्रांट न मिलने से विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थित गड़बड़ाने लगी थी। स्टाफ के वेतन पर संकट के बादल उमड़ आए थे। विवि प्रशासन परीक्षा मद से आने वाली राशि से वेतन का भुगतान कर काम चला रहा था। रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने 82.56 लाख की ग्रांट को मंजूरी दी है।
Published on:
05 Aug 2019 09:00 am
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