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मिली मंजूरी…’तलाक’ लेने का विरोध करना मानसिक क्रूरता, हाइकोर्ट का बड़ा फैसला

MP News: पति की ओर से दावा किया गया कि पत्नी ने 2018 में शादीशुदा व्यक्ति से विवाह कर लिया। अवैध विवाह के खिलाफ भी मामला चला।

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(Photo Source - Patrika)

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MP News: नौ वर्ष से अलग रहे दंपती के तलाक को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंजूरी दे दी। फैमिली कोर्ट के तलाक न देने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने कहा कि दूसरा पक्ष तलाक की अर्जी का विरोध करता है, जबकि उनके साथ रहने की कोई संभावना नहीं। दूसरे पक्ष की मुश्किलों और तनाव से खुशी पाने का यह व्यवहार भी क्रूरता है।

फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती

यह अपील पत्नी की ओर से दायर की गई थी। जिसमें छिंदवाड़ा फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। विवाह 2002 में हुआ था। दो बेटियां हैं। दंपती में विवाद हुआ और पत्नी ने कोर्ट में आवेदन देकर दहेज उत्पीड़न का आरेाप लगाया। अलगाव की मांग की। बाद में सुलह हो गई। पत्नी ने केस वापस ले लिया। वे छह माह तक साथ रहे। विवाद फिर बढ़ा तो पत्नी 2016 में घर छोड़कर चली गई।

हाईकोर्ट ने मंज़ूर किया तलाक

पति की ओर से दावा किया गया कि पत्नी ने 2018 में शादीशुदा व्यक्ति से विवाह कर लिया। अवैध विवाह के खिलाफ भी मामला चला। फैमिली कोर्ट ने इस अनुमान पर तलाक की याचिका खारिज कर दी कि पत्नी को उसे अपनी गलतियों का फायदा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह गलत कामों पर इनाम देने जैसा होगा। हाईकोर्ट ने इस आधार पर तलाक मंज़ूर कर दिया कि पति पत्नी के साथ क्रूरता कर रहा था क्योंकि वह उसे अपनी पसंद के हिसाब से जिंदगी जीने का ऑप्शन नहीं दे रहा था जो कि एक मौलिक अधिकार है।