
mp highcourt dismissed petition against officers
जबलपुर। संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने देशभर से भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भोपाल आ रहे हैं। मोहन भागवत की ऐसी ही क्लास जबलपुर में भी लग चुकी है जहां उनसे मिलने कई सरकारी अफसरों की कतार लग गई थी। इस मामले में हाईकोर्ट में एक याचिका भी लगाई गई थी जिसपर सोमवार को फैसला सुनाया गया।
निरस्त कर दी जनहित याचिका
मप्र हाईकोर्ट ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के जबलपुर प्रवास के दौरान केंद्र व राज्य सरकार के कई अफसरों द्वारा भागवत की पाठशाला में हाजिरी देकर नगर निगम चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका निरस्त कर दी है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस राजीव कुमार दुबे की डिवीजन बेंच ने याचिका को प्रचलन योग्य न पाते हुए यह निर्देश दिए।
यह है मामला
डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम जबलपुर के अध्यक्ष ओपी यादव की ओर से यह याचिका ७ अगस्त २०१५ को दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि अगस्त की शुरुआत में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नगरागमन हुआ था। प्रवास के दौरान वे गोलबाजार रोड स्थित एक चिकित्सक के यहां पहुंचे थे। उसी समय उनसे मिलने कमिश्नर प्रोविडेंट फंड, टेलिकॉम विभाग के जबलपुर रीजन जीएम, पमरे के जीएम सहित तमाम आला अफसर वहां पहुंचे। भागवत के साथ सभी ने लंबी चर्चा की। जबकि उस समय जबलपुर नगर निगम के लिए होने वाले चुनाव की आचार संहिता लागू थी। दोपहर को प्रकाशित होने वाले एक अखबार में प्रकाशित इस आशय की खबर को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रवींद्र गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि यह सरासर आचार संहिता का उल्लंघन है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका को प्रचलन योग्य नहीं पाया।
भागवत को जारी नोटिस हुए रिकॉल
१३ अगस्त २०१५ को कोर्ट ने याचिका में बनाए गए पक्षकारों को नोटिस जारी करने के निर्देश दे दिए थे। पक्षकारों में संघ प्रमुख भागवत का नाम भी था। इस पर तत्कालीन अतिरिक्त महाधिवक्ता केएस बाधवा के ध्यानाकर्षण पर उसी रात को कोर्ट फिर से मामले की सुनवाई के लिए बैठी। आननफानन में संघ प्रमुख को जारी नोटिस वापस ले लिया गया। भागवत का नाम भी पक्षकारों की सूची से हटा दिया गया।
Published on:
10 Oct 2017 08:23 am
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