
Family Court decision Working wife has no right to alimony (file photo)
mp news: तलाक के बाद पति पत्नी को भरण पोषण के लिए हर महीने पैसे देता है और पति कितने पैसे पत्नी को देगा ये फैसला कोर्ट करता है। मध्यप्रदेश के जबलपुर में भी फैमिली कोर्ट में एक महिला ने तलाक के बाद पति से भरण पोषण के लिए कोर्ट में याचिका दायर की लेकिन कोर्ट में ने महिला की भरण पोषण की याचिका को ये कहते हुए खारिज कर दिया है कि महिला खुद प्राइवेट जॉब करती है इसलिए वो भरण पोषण की अधिकारी नहीं है।
जबलपुर फैमिली कोर्ट में तलाकशुदा महिला ने दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 125 के तहत भरण पोषण की राशि के लिए याचिका दायर की थी। कोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट में पति की ओर से बताया गया कि महिला तलाक लेने के बाद प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रही है और उसे अच्छी सैलरी भी मिल रही है। केस पेंडिंग होने के दौरान उसने जॉब शुरू कर दी थी और अपनी इनकम को भरण पोषण पाने के लिए कोर्ट से छिपाए रखा।
कोर्ट में महिला ने भी प्राइवेट नौकरी करने की बात स्वीकार की और बताया कि वो फाइनेंस कंपनी में काम करती है। ईपीएफ काट उससे दस हजार रुपए मिलता है। जबकि उसका पति प्राइवेट जॉब कर 7 हजार रूपये महीने कमाता है और बेटा भी पिता के साथ रहता है जिसका पूरा खर्च पिता उठाता है। इन सब पहलूओं को सुनने के बाद प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश संदीप शर्मा ने फैसला सुनाते हुए अपने आदेश में कहा कि आवेदिका तुलनात्मक आय अर्जित कर रही है। जो स्वयं के प्रतिमाह भारण-पोषण के लिए पर्याप्त है। इसलिए वो भरण पोषण का अधिकार नहीं रखती और उसकी याचिका खारिज की जाती है।
Published on:
16 Nov 2025 04:27 pm
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