
speech of tripuri-jbp
जबलपुर। देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देनेवालों में सुभाषचंद्र बोस का नाम अग्रणी है। वे सच्चे अर्थों में राष्ट्रनायक थे। नेताजी का जबलपुर से बड़ा करीबी नाता था। इसी शहर के त्रिपुरी में हुए कांग्रेस के ५२ वें अधिवेशन में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में गांधीजी के प्रतिनिधि पट्टाभि सीतारमैया को हराया था। इस घटनाक्रम ने देश की तत्कालीन राजनीति में उथल-पुथल मचा दी थी लेकिन त्रिपुरी अधिवेशन को महज इसी वजह से याद नहीं रखा जाना चाहिए। गांधीजी के प्रतिनिधि की हार के साथ ही इस अधिवेशन में और भी बहुत कुछ खास हुआ था।
सत्ता लोभ और भ्रष्टाचार की बात
त्रिपुरी में ही नेताजी ने अपने उदबोधन में कांग्रेस की हालत पर चिंता व्यक्त की थी। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस अधिवेशन में कांग्रेस के सत्ता लोभ और उसमें घुस आए भ्रष्टाचार पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की गई थी। मुख्य वक्ता सुभाषचंद्र बोस उस समय कांग्रेसाध्यक्ष भी थे। इस तरह १९३९ में स्वयं कांग्रेसाध्यक्ष ने कांग्रेस के सत्ता लोभ और भ्रष्टाचार की बात करते हुए इसे दूर करने की जरूरत भी जताई थी।
क्या कहा था नेताजी ने
....स्वराज्य की दिशा में हमारे अंतिम कदम की बात मैं पहले ही कह चुका हूं. उसके लिए तैयारी की जरूरत होगी. सर्वप्रथम सत्ता के लोभ के कारण हमारे प्रबंध में जो भ्रष्टाचार घुस आया है, उसे कठोरता से दूर करना होगा. तत्पश्चात देश की सभी शक्तियों के निकट समन्वय एवं सहयोग से काम करना होगा तथा देश के सभी साम्राज्यवाद विरोधी संगठनों का प्रयास ब्रिटिश साम्राज्य पर अंतिम आघात होगा.
--- बंधुओं! कांग्रेस का वर्तमान वातावरण धूमिल हो चुका है और मतभेद उभर आये हैं. फलस्वरूप हमारे अनेक मित्र खिन्नचित्त और हतोत्साह हो गये हैं. किन्तु मैं अपरिवर्तनीय आशावादी हूं. आप जिस मेघ को देख चुके हैं, वह जानेवाला मेघ है. मुझे अपने देशवासियों के देशप्रेम पर विश्वास है. हमें भरोसा है शीघ्र ही हम इन कठिनाइयों पर विजय पायेंगे. .....वंदेमातरम.
Published on:
23 Jan 2018 11:39 am
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